क्या लिखूँ तेरी सूरत की तारीफ़ में

kya likhe teri tarif me

तेरी अदाएँ देख देख कर क्या लिखूँ तेरी सूरत की तारीफ़ में ए मेरे ”मन” ,सारे अल्फाज खत्म हो गए मेरे , तेरी अदाएँ देख देख कर … ईद का सारा जिम्मा ईद का सारा जिम्मा, अब चाँद पर आ ठहरा है ,, शहर भर की निगाहें, तेरी छत पर टिका है …!!! किसी ने दरवाज़ खटखटाया मेरा आज फिर किसी ने दरवाज़ खटखटाया मेरा,, जरा ध्यान से देखना, अगर इश्क़ हो तो कहना खुदा के लिये माफ़ करे …!!! बे-वजह खामोश नही हुए बे-वजह खामोश नही हुए है वो…

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आज अजीब किस्सा देखा हमने

Aj ajib sa kissa dekha

एक शख्स ने मोहब्बत कर लिया आज अजीब किस्सा देखा हमने खुदकुशी का ।।। एक शख्स ने ज़िन्दगी से तंग आकर मोहब्बत कर लिया ।।। खिलखिलाऊँगी तुम्हारे सम्मुख तुम हृदय से पुकारना मुझे, मैं वहाँ भी निकल कर , खिलखिलाऊँगी तुम्हारे सम्मुख …।।। हमने बखूबी से निभाया उस रिश्ते को भी हमने बखूबी से निभाया । जिसमें न मिलना हमारी, पहली शर्त थी … इस अंधेरे से भरे रौशनी में रहने दे मुझे, इस अंधेरे से भरे रौशनी में … कमबख़्त ये उजाले की रौशनिया, हर वक्त तम्हारी ही तस्वीर…

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मुझे बड़ी अच्छी लगी

मुझे बड़ी अच्छी लगी

चार दिन इश्क़ मोहब्बत मुझे बड़ी अच्छी लगी उसकी ये अदा..!!! चार दिन इश्क़ मोहब्बत और फिर अलविदा…!!! प्यार वो है जो देखते देखते हो प्यार वो नहीं , जो कोई प्लान बनकर करता है .. प्यार वो है… जो देखते देखते आपरुपि हो जाता है ..!! इश्क़ एक खतरा है इश्क़ एक खतरा है “ए मन” … और मुझे लगता है , कि मैं खतरे में हूँ ..! बिखरने से तकलीफ होती मुझे वक्त गुजारने के लिये मत चाहा कर… मैं भी इंसान हूँ…!! मुझे भी बिखरने से तकलीफ…

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अपने ख्वाबों में जिसने भी तुम्हें देखा

अपने ख्वाबों में जिसने भी तुम्हें देखा

आँख खुलते ही ढूँढने निकला अपने ख्वाबों में जिसने भी तुम्हें देखा होगा … यकीनन आँख खुलते ही वो, तुझे ढूँढने निकला होगा… उनके मीठे लफ्ज जब बरसते उनके मीठे लफ्ज जब बरसते है , बनकर बूँदे … यकीनन मैसम कोई भी हो , मन भीग ही जाता है..!! बरस रही थी बारिश जमकर बरस रही थी, बारिश बाहर ,, और वो न जाने कब से, भीग रही थीं अंडर मुझ में। बरसात का भरोशा नहीं बरसात का भरोशा नहीं, कि कब बरस जाए ,, आओ एक छतरी के नीचे…

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अगर तुम पूछो अपनी अहमियत

agar tum mujhse pucho

तुम्हें अपने पास रख लूं अगर तुम पूछो अपनी अहमियत मुझसे , तो सुनो मन ,, सिर्फ तुम्हें अपने पास रख लूं , तो मैं सबसे अमीर हो जाऊँ ।। अचानक चौँक उठे “नींद’ से हम अचानक चौँक उठे “नींद’ से हम… किसी ने शरारत से कह दिया … सुनो वो “मिलने” आ रही … तेरी जुल्फें तेरे गाल तेरी जुल्फें , तेरे गाल , तेरे होंठ , तेरी कमर …उफ्फ एक नदी मे इतने भंवर … तेरी यादों ने उड़ा दिए मेरे होश आज एक बार फिर से ,…

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किसी तरह तुम तक पहुंच ही जाता

किसी तरह तुम तक पहुंच ही जाता

ठिकाना मालूम है इस दिल को किसी भी तरह, तुम तक पहुंच ही जाता हैं यह दिल ,, चाहे इसे जितना भी बहलाऊं…ठिकाना अपना मालूम है, जो इस दिल को … कैसे एक एक पल बीतता है सुनो “मन”, तुम पूछ लेना सुबह से, न यकीन हो तो शाम से… कि कैसे एक एक पल बीतता है,, सिर्फ इस दिल का तुम्हारे नाम से । दर्द मेरे बिलकुल पास था इश्क़ को एकदम, अपने करीब से गुजरते हुए देखा … यकीनन दर्द मेरे बिलकुल पास था … फिलहाल मेरा दिल…

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बारिश की तरह कभी तुम भी

बारिश की तरह कभी तुम भी

तुम्हें महसूस करना चाहता बारिश की तरह कभी तुम भी बरस जाओ मुझ पर … मैं बूँद-बूँद तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ । ये बारिश इस तरह मत बरस ये बारिश इस तरह मत बरस, कि वह आ न सकें , उनके आने कें बाद इतना बरस की वह जा न सकें …! इश्क़ से भरी आँखे देखकर इश्क़ से भरी आँखे देखकर, डाँक्टर ने कहा- आपको आँखो का ईलाज नहीं, दिल को सुकून चाहिए । तुम्हारे साथ बिताई यादें ना जाने कब खर्च हो गया, तुम्हारे साथ बिताई हुई…

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वो अक्सर पूछा करती थी

वो अक्सर पूछा करती थी

मैं अक्सर कहा करता था वो अक्सर पूछा करती थी, क्या कर रहे हो ??? मैं अक्सर कहा करता था कुछ भी नही , सिवाय तुम्हें याद करने के … जहाँ हम अक्सर मिला करते अक्सर , घंटो ठहर कर देखता हूँ उस गली में ,, जहाँ हम अक्सर मिला करते थे, और ठहर कर घंटो बातें किया करते थे … तुमसे मोहब्बत कुछ इस तरह तुमसे मोहब्बत कुछ इस तरह थी … कि मैं बता नहीं सकता, गिना नहीं सकता, दिखा नहीं सकता । दिल के किसी कोने में…

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अगर इशारों में ही बातें करनी थी

अगर इशारों में ही बातें करनी थी

अपनी आँखों को सजाते अगर इशारों में ही बातें करनी थी , तो पहले बताते । हम अपनी शायरी को नही, अपनी आँखों को सजाते !!! जब भी मैं टूटता हूँ जब भी मैं टूटता हूँ, तुम्हे ही ढूंढता हूँ । कभी तुमने ही एक बार कहा थी ना , हम एक है !!! तुमको पाकर जमाने से तुमको पाकर जमाने से खोना कौन चाहेगा । इस शहर में तन्हां होना कौन चाहेगा ।।। मुझे ज़िन्दा देख कर बोली वो मुझे ज़िन्दा देख कर बोली … “मन” बद्दुआ नही लगती…

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उन झुकी निगाहों से भी चोट लगता

उन झुकी निगाहों से भी चोट लगता

देखकर भी अनदेखा कर देता उन झुकी निगाहों से भी चोट लगता है “मन” !!! जो हर बार देखकर भी अनदेखा कर देता है “मन” ।।। यूं ही चलते चलते यूं ही चलते चलते जो आवाज दी थी न तुमने… कदमों की क्या औकात, सांसे तक रुक गई थी मेरी … एसे इतवार मनाने का क्या फायदा, तुमको एसे इतवार मनाने का , जो समय ही ना मीले, मुझसे मिलने आने का… कोई दूसरी कहानी पढ़ लो कोई दूसरी कहानी पढ़ लो “मन” !!! ये वाली कहानी मे तो ,…

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