Tag: Aate hue log Hindustan Newspaper

khud ko khash samajh baitha ta

खुद को खास समझ बैठा था Fursat Hindustan Newspaper poem Fursat Hindustan Newspaper poem शायद गलती मेरी ही थी , मै खुद को खास समझ बैठा था । तुम्हे खुद के पास समझ बैठा था । तुम खुश थी पहले से ही…Read More »

इतंजार, Aate hue log Hindustan Newspaper

इतंजार, Aate hue log Hindustan Newspaper हर किसी का कयामत को इतंजार होता हैं , यहाँ हर कोई वक्त का शिकार होता हैं । क्या पंछी क्या पर्वत क्या हवा ओ खुशबू , जो दिल में बस जाए वही प्यार होता हैं…Read More »