Tag: Aate hue log Hindustan Newspaper EVERY SUNDAY

khud ko khash samajh baitha ta

खुद को खास समझ बैठा था Fursat Hindustan Newspaper poem Fursat Hindustan Newspaper poem शायद गलती मेरी ही थी , मै खुद को खास समझ बैठा था । तुम्हे खुद के पास समझ बैठा था । तुम खुश थी पहले से ही…Read More »

इतंजार, Aate hue log Hindustan Newspaper

इतंजार, Aate hue log Hindustan Newspaper हर किसी का कयामत को इतंजार होता हैं , यहाँ हर कोई वक्त का शिकार होता हैं । क्या पंछी क्या पर्वत क्या हवा ओ खुशबू , जो दिल में बस जाए वही प्यार होता हैं…Read More »