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अन्जान सफर

अन्जान सफर था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था…. बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था…. ना जाने था वो कौन सा अजब खेल मेरे घर में…. बच्चो की तरह मुझे कंधे पर उठाया जा रहा था….…Read More »