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khud ko khash samajh baitha ta

खुद को खास समझ बैठा था Fursat Hindustan Newspaper poem Fursat Hindustan Newspaper poem शायद गलती मेरी ही थी , मै खुद को खास समझ बैठा था । तुम्हे खुद के पास समझ बैठा था । तुम खुश थी पहले से ही…Read More »