अपने ख्वाबों में जिसने भी तुम्हें देखा

अपने ख्वाबों में जिसने भी तुम्हें देखा

आँख खुलते ही ढूँढने निकला अपने ख्वाबों में जिसने भी तुम्हें देखा होगा … यकीनन आँख खुलते ही वो, तुझे ढूँढने निकला होगा… उनके मीठे लफ्ज जब बरसते उनके मीठे लफ्ज जब बरसते है , बनकर बूँदे … यकीनन मैसम कोई भी हो , मन भीग ही जाता है..!! बरस रही थी बारिश जमकर बरस रही थी, बारिश बाहर ,, और वो न जाने कब से, भीग रही थीं अंडर मुझ में। बरसात का भरोशा नहीं बरसात का भरोशा नहीं, कि कब बरस जाए ,, आओ एक छतरी के नीचे…

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बेसब्री से इंतज़ार है बारिश का

बेसब्री से इंतज़ार है बारिश का

बेसब्री से इंतज़ार बेसब्री से इंतज़ार है बारिश का यूँ तो मुझे .. मेरा दिल तो बस, तेरे प्यार बरसाने पे तरसा है … ये जो अगस्त के बादल सुनों मन, ये जो अगस्त के बादल हैं ना… ये बिल्कुल तुम्हारे जैसे ही है… आस तो रहती हरदम, मगर बरसती कभी कभी … थोड़ा और करीब आओ थोड़ा और करीब आओ तुम, कि हम एक हो जाए ,, नकाब मे रखना अपने चेहरे को, कही देख कर मेरा दिल मचल ना जाए । इन बारिश की बूंदों में इन बारिश…

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बारिश की तरह कभी तुम भी

बारिश की तरह कभी तुम भी

तुम्हें महसूस करना चाहता बारिश की तरह कभी तुम भी बरस जाओ मुझ पर … मैं बूँद-बूँद तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ । ये बारिश इस तरह मत बरस ये बारिश इस तरह मत बरस, कि वह आ न सकें , उनके आने कें बाद इतना बरस की वह जा न सकें …! इश्क़ से भरी आँखे देखकर इश्क़ से भरी आँखे देखकर, डाँक्टर ने कहा- आपको आँखो का ईलाज नहीं, दिल को सुकून चाहिए । तुम्हारे साथ बिताई यादें ना जाने कब खर्च हो गया, तुम्हारे साथ बिताई हुई…

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मोहब्बत को शीतल रहने दो

मोहब्बत को शीतल रहने दो

इश्क़ को सावन रहने दो मोहब्बत को शीतल रहने दो , दिलो को पावन रहने दो..!! ज्येष्ठ की तरह मत जलाओ , इश्क़ को सावन रहने दो….!!!! तुम्हारे रसिले होंठ चाय तो मैंने हमेशा सही समय और सही मात्रा में पी हैं । ये शुगर होने का कसूरवार तो तुम्हारे रसिले होंठ है ।।। मुँह ज़ुबानी न बता इश्क क्या है सिर्फ ऐसे ही मुँह ज़ुबानी न बता कि इश्क क्या है ??? मुझसे कर के दिखा तब मैं जानु कि ये इश्क क्या है …?? ख़्वाब तुम्हारा ही देखूँ…

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हम भी अक़्सर फूलो कि तरह तन्हा रहते

हम भी अक़्सर इन फूलो कि तरह तन्हा रहते

फूलो कि तरह तन्हा रहते हम भी अक़्सर इन फूलो कि तरह तन्हा रहते हैँ .. कभी ख़ुद टूट जाते है , कभी लोग हमे तोड़ जाते है ..lll तेरे बहुत करीब आकर काश मैं बारिश की बूंदें बन जाऊं… . तेरे बहुत करीब आकर तुझपर बरस जाऊं।।। रिमझिम तो मेरी आँखों से रोज होती ऐ बारिश जरा खुलकर बरस , ये क्या तमाशा है ….!! इतनी रिमझिम तो मेरी आँखों से रोज होती है…! अपने महबूब के तलाश में मेरी हि तरह चाँद भी भटकता रहता , अपने महबूब…

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बहुत जल रहा था दिल

बहुत जल रहा था दिल

उनकी यादों में बहुत जल रहा था “दिल” उनकी यादों में । अच्छा हुआ रिमझिम रिमझिम बारिश पड़ती रही उसपर !!! बारिश का मौसम सुनों एक मुट्ठी चाहत के बीज बिखेर लो अपनी दिल की ज़मीन पर , बारिश का मौसम है , शायद तुम्हारे दिल में थोड़ी मोहब्बत पनप जाए। मेहबूब याद आ गयी ज़रा सी बारिश क्या हुई शहर में , किसी को मेहबूब तो किसी को उसकी याद आ गयी ।। दुनिया की तन्हाई में मत ढूंढो मुझे इस दुनिया की तन्हाई में ,, गुलाब की पोशाक…

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सूर्य को बहुत अभिमान था तेज चमक पर

सूर्य को बहुत अभिमान था तेज चमक पर

उसका सारा अभिमान चूर कर दिया सूर्य को बहुत अभिमान था , अपने तेज चमक पर । बादलों ने एक झटके में उसका सारा अभिमान चूर कर दिया । इस मौसम की सर्द हवाएं इस मौसम की सर्द हवाएं , न जाने कितने कितनो को बीमार करेगी , और न जाने कितने कितनो को बेकरार करेगी । इस सर्दी की सुबह में कोहरे में लिपटी इस सर्दी की सुबह में , कुनकुनी धूप सा सुकून देती हो तुम ….. इस मौसम में वो मज़ा कहाँ तेरे बगैर इस मौसम में…

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फिर से तेरी यादों का मेरे दिल में बवंडर

फिर से तेरी यादों का मेरे दिल में बवंडर

एक दूसरे को ओढते है चलो आज सर्दी का गुरूर तोड़ते है , कम्बल की जगह एक दूसरे को ओढते है। हम भी अलविदा कह देंगे एक दिन दिसम्बर की तरह हम भी अलविदा कह देंगे एक दिन , फिर ढूंढते फिरोगे हमें जनवरी की हसीन रातों में !! एक मुलाकात दे जाओ एक मुलाकात दे जाओ… इस साल के आखिरी महीने में ही सही … एक समय दे जाओ… किसी दिन मिलने का ख्वाब में ही सही । तेरी यादों का मेरे दिल में बवंडर फिर से तेरी यादों…

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ये हवाएँ इतनी लुभावनी मत बन

ये हवाएँ इतनी लुभावनी मत बन

कहीं वो तुझसे भी नफरत न करे ये हवाएँ इतनी लुभावनी मत बन , कहीं वो तुझसे नफरत न करने लगे।।। बदलना किसको कहते मौसम की मिसाल दूँ या नाम लूँ तुम्हारा , कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं। मोहब्बत के जख्म मोहब्बत के जख्म “किसी भी मौसम में देख सकते हो मन , मोहब्बत के जख्म हर मौसम में ताजे ही दिखेगे !! मुहब्बत भी बारिश जैसी होती ये मुहब्बत भी बारिश जैसी होती है , जिसे छू लेने से•• हथेली तो गीली हो जाती है ,…

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तेरे साथ बरसात में भीगने का ख्वाब

tere sath barsat me

बरसात में भीगने का ख्वाब तेरे साथ बरसात में भीगने का ख्वाब , आज भी अधूरा हैं… जब भी बारिश होती, तो बाहें फैला के तुझे महसूस कर leta हूँ… एक बार मुझे हाथ थमा देती वो अक्सर ज्योतिष को हाथ दिखाकर नसीब पुछती थी अपना… एक बार मुझे हाथ थमा देती, तो नसीब बदल जाता पगली का … उसे मुफ्त में दिल डे दूँ जी चाहता है उसे मुफ्त में दिल डे दूँ , इतने मासूम खरीदार से क्या लेना देना…! आते है उनको जादू आते है उनको.. जादू…

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Mousam Shayari ;- जिस तरह बादल बिना बरसात नहीं , ठीक उसी तरह मौसम के जिक्र बिना शायरी नहीं … पुराने समय से हि कवियों ने अपने कविताओं में मौसम कि बात जरुर छेड़ा है , तभी तो आज हर मौसम आते हि अपने साथ एक मोहक धुन के कर आता है …

बसंत कि ऋतु को कवियों व् लेखकों ने ” प्यार कि फूल खिलाने व् प्यार कि खुशबु फ़ैलाने ” से किया है … शीत कि ऋतु को कवियों व् लेखकों ने ” एक दूसरे  में खो जाने से ” ज़िक्र किया है … बारिश कि ऋतु को कवियों व् लेखकों ने ”बारिश  कि बूंदों में एक दूसरों को भींगने ”  से किया  है …

सभी ऋतुएँ हमारे जीवन कि खुशियों के साथ जुड़ा है , जिसका हमसब बेसब्री से इंतज़ार करते है , और उन रितुओ में खुद को झोंक देते है …