By | 3rd April 2019

मोहब्बत का पैगाम

वो सरेआम मुझसे नफरत का इजहार करती रही ,,

और मैं सरेआम उन्हें मोहब्बत का पैगाम भेजता रहा ।

मोहब्बत का पैगाम

अपने पास से गुजरते

जब मैं Byk चलाता हूँ , तब बहुत से लोगों को अपने पास से गुजरते हुए देखता हूँ , लेकिन जब मैं उदास होता हूँ तब किसी शक्स को इतने करीब से गुजरते नहीं देखा , जितना तुम्हे देखा हू ।।।

अपने पास से गुजरते

नक़ाब में रखो चेहरा

उठालो दुपट्टा कहीं दाग न लग जाए…

नक़ाब में रखो ये चाँद सा चेहरा, कहीं आग न लग जाए….

नक़ाब में रखो चेहरा

मैंने उसे इतना चाहा

मैंने उसे इतना चाहा कि , खुद चाहत भी जाकर उससे बोल दिया ,,

सुनो ”मन” , वह तुम्हें सच में बहुत चाहता हैं ।

मैंने उसे इतना चाहा

करोगे प्यार कब तक

उनसे पुछा, आखिर करोगे प्यार कब तक …

रख कर दिल पे हाथ कहा, धडकेगा यह सीने में जब तक…

करोगे प्यार कब तक

याद कर लेना मुझे

याद कर लेना मुझे तुम , कोई भी जब पास न हो ,,

चले आएंगे इक आवाज़ में भले हम ख़ास न हों…

याद कर लेना मुझे

गुजर जाता कोई अगर मेरे सामने से

गुजर जाता कोई अगर मेरे सामने से ,

तो जरा सा भी फर्क नहीं पडता ,,

मगर कोई तेरा नाम भी पुकारे , तो दिल बेचैन हो जाता …

 गुजर जाता कोई अगर मेरे सामने से

196 Replies to “वो सरेआम नफरत का इजहार करती रही”

  1. Gipsstaf

    I want to switch to a clean new WordPress theme for a site, but Google has indexed 2500 pages from the old site (mainly due to a calendar module creating a new page for each day). How do I ensure all those pages remain accessible for Google, without throwing up a “Page Not Found” when someone tries to access it after installing the new WordPress theme. The current site is content managed and is running pHp… viagra en ligne

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *