Republic day Shayari गणतंत्र दिवस

Republic day Shayari गणतंत्र दिवस

Republic day Shayari , Hindi shayari

गणतंत्र दिवस


रक्त कि होली 

  • चढा दो सूली पर , मगर वतन से भर दो हमारी झोली ….

माँ भारती कि कसम , कभी न इसे झुकने देंगे ,,

चाहे क्यों न खेले हम रक्त कि होली  ….


गणतन्त्र का त्यौहार

  • दिन कोई भी हो , काश हो जाए चमत्कार ,,

आज हो या कल , हर दिन हम मनाए इस गणतन्त्र का त्यौहार …..

उपहार देना , मिठाईयां बाटना , ये सब तो है रीती रिवाज ,,

तिरंगे को हम कभी झुकने न दे ,

यह है हमारा पहला जन्मसिद्ध अधिकार ….

गणतन्त्र का त्यौहार
MAA BHARATI …

लहरा दो तिरंगा

  • लहरा दो तिरंगा , सरहदों के उस पार भी ….

वैसे तो है हम इस पार , दुश्मनों को दिखा दो ,,

रहते है हम उस पार भी …..

गणतन्त्र का त्यौहार


वतन कि आजादी

  • ऐसा तो कभी हुआ नहीं ,

हम वतन के लिए लड़े , और वतन से हमें कुछ मिला नहीं ,,…

आज हम जीतनी आजादी से रह रहे ,

न जाने इसके लिए कितने शहीदों ने , अपनी पूरी जिंदगी जिया नहीं …

वतन कि आजादी


हम सब एक वादा करे

  • इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर , आज हम सब एक वादा करे …

प्यार तो सब करते है , मगर माँ भारती से ज्यादा करे ….

हम सब एक वादा करे


माँ भारती के लाल

  • सरहदों पर खड़े सैनिको कि , यह मौसम उनका क्या बिगाड़ेगी ,,

जिन्होंने बड़े बड़े हथियार व गोला बारूदो कि वार झेली है …..

कहने को तो वह एक सैनिक है ,

मगर माँ भारती के लाल कहलाना , उनकी अपनी ही निशानी है ….

माँ भारती के लाल


  • बापू कि बाते 

झुठ कि बाते और लड़ाई झगडो के हिंसा में कुछ नहीं रखा है ….

यकीं नहीं तो याद कर लो बापू कि बाते ,,

जो चीख चीख कर कहते थे , सत्य और अहिंसा में ही सब कुछ छिपा है ….

बापू कि बाते 


झुके हुए तिरंगे

  • झुके हुए तिरंगे को उठाना हर भारतीयों के लिए एक गौरव है ….

क्योकि यह हमारी आन ,बाण और शान है ,,

तथा उन सभी शहीदों का अभिमान है ….

इसे कभी झुकने न देना ….

झुके हुए तिरंगे


शहीदों के शहादत

  • माँ भारती ने ऐसे न जाने कितने शहीदों को जन्म दिया ,,

जिन्होंने बिना कुछ सोचे समझे ,

माँ भारती के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया …

आसमा भी हैरान हो गया था , देखकर इस अद्भुत नज़ारे को ,,

आज भी यह रो देता , याद करके उन शहीदों के शहादत को ….

शहीदों के शहादत


मिटटी के संतानों कि 

  •  इस मिटटी के संतानों कि , बस एक ही चाहत थी ,,

कि लहरा दो तिरंगा हर चौक चौराहों पर ….

रोके से भी कभी न रुके ,

चाहे क्यों न देनी पड़े हमें अपनी जान, किसी भी राहों पर ….

मिटटी के संतानों कि 


आजादी कि खुशबू

  • शहीदों के खून से सने इस मिटटी से ,

आजादी कि खुशबू आती है ….

एक नहीं दो नहीं अनेको कुर्बानिय दिए थे उन्होंने ,

तब जाकर आज वतन से , उनके नाम कि महक आती है ….

आजादी कि खुशबू


JAI HIND

I LOVE MY INDIA

 

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