By | 24th November 2019

Poverty crush in Indian politics

 

एक खाली पेट लिये भटक रहा था , शहर की सड़को पर । अनेक लोगों ने मुस्कुराते हुए मेरे फटे मैले कपड़े देखे, लम्बी ढ़ाड़ी व उलझे लंबे बाल देखे। मेरे बिरादरी के ही कुछ लोगों ने मेरे खबर पुछे , पर जो मुझसे ऊपर के लोग थे , वो नजदीक भी न आए न ही कुछ दूर से ही बोले ।मैं अपना खाली पेट छुपाए आगे चलता रहा ।

POVERTY IN INDIA FOR WATER

 

POVERTY IN INDIA FOR WATER

ज्येष्ठ का महीना था , सुर्य सिर के ऊपर था। प्यास के मारे मेरा गला भी सूख रहा था । मेरे शरीर के अंग अंग को पानी की जरुरत थी , मगर आस पास कही पानी नहीं दिखाई दिया । मै अपने लड़खड़ाते पैरों के सहारे पानी की तलाश मे आगे बढ़ा । बड़ी मुश्किल से सामने एक कुआँ दिखाई दिया , जहाँ कुछ महिलाएं अपने घड़े में पानी भर रही थीं और कुछ महिलाएं अपने जानवरों को नहला रही थीं और कुछ जानवरों को पानी पिला रही थीं । मैं यह देखकर बहुत खुश हुआ ,, और मन ही मन प्रभु को धन्यवाद कहा ! पानी देखकर मेरे लड़खड़ाते पैरों में एक नई ऊर्जा आ गई ,, और जल्दी जल्दी उस कुएँ की ओर चलने लगा । पर उन महिलाओं ने मुझे दूर से ही आता देख कर चुपचाप आगे बढ़ने का इशारा करते हुए खदेड़ दिया । मैं लाचार चुपचाप , उनके बताए इशारो की तरफ चल दिया और चलते चलते “मन” में सोच रहा था कि “गरीबी जानवरों से भी दबी कुचली होती हैं क्या ” ???

खैर मैं अपनी किस्मत को कोसता हूआ आगे बढ़ता गया । चलते चलते थोड़ी दूर पर , सामने का दृस्य देखकर , मैं हैरान हो गया । मेरी आँखे कूछ देर तक खुली की खुली ही रह गई । वहाँ मेरे ही बिरादरी के कई लोग मस्ती से खा पी रहे हैं । नए नए स्वादिस्ट पकवान , मांस मछली , मंदीरा की उम्दा व्यवस्था थीं। सभी के चेहरे पर खुशी की एक चमक थी । सच कहूँ तो सब सुकून की ज़िंदगी जी रहे थे। मैं भी झट से लपक कर उस शानदार महफिल में शामिल हो गया और दावत चखने लगा । लगभग 4 – 5 वर्षों के बाद ऐसा खाने पीने का आनंद लिया हमने । हम सब लोग खाए पिए और मिलकर खुशी के गीत गाए । वहाँ हम सब की प्रशंशा की जा रही थीं । ऐसा ही रोज रोज चलता रहा …

political causes of poverty

 

political causes of poverty

Poverty Crush In Indian Politics

पर अचानक 6वे या 7वे दिन देखा की वो खुशियों की महफ़िल सुनसान हो गई , खाने पिने की जो व्यवस्था थी सब समाप्त हो गई …. चारो तरफ सन्नटा बिखर गया था । फिर से वही चीख पुकार गूँजने लगी। एक बार फिर हम सब के सुखी आँखे आँसुओ की बादल से घिर गए । मैं भी अपना खाली पेट लिये वही चुपचाप बैठ गया , और फिर से उस शानदार महफिल का इंतजार करने लगा । यूँ ही कई दिन बीत गए । तभी एक दिन सुबह सुबह एक अजनबी आता हुआ कहने लगा … बाबा , अब वो शानदार महफिल फिर अगले 5 बरस के बाद ही लगेगा । पिछ्ले कुछ दिन पहले चुनाव की घड़ी थी न ! इसलिए नेताओं ने 5 बरस तक अपना सुकून पाने के लिए , हम जैसे लोगों को कूछ दिन सुकून का लालच देकर वोट लेकर चले गये ! और इस बार भी वह अपने मकसद में कामयाब हो गए । उम्मीद है , अगली बार आप लालच की गलती नहीं करेंगे ! यह कहते हुए वो अजनबी चला गया । अब मैं भी अपना खाली पेट लिये वहाँ से चल पड़ा । यूँ ही भूख से तड़पते तड़पते महीने के आखिरी में दुनिया छोड़कर मैं चला गया ।

और फिर से अगली बार वो नेता अपने मकसद में कामयाब हो गए … और हमारे समाज में ऐसा ही चलता रहा … indian’S Politics     

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