हजार शिकायते रट रखी थी हमने

Hazar shikayate rat rakhi

वो मुस्कुरा कर ऐसे गले लगे

हजार शिकायते रट रखी थी हमने , उन्हें सुनाने को ,,

वो मुस्कुरा कर ऐसे गले लगे , कि मुझे एक भी याद ना रही …

वो मुस्कुरा कर ऐसे गले लगे

चाहत की बारिशों का मौसम

चाहत की बारिशों का कोई मौसम कहाँ होता है…
वो तो बेसुध बरसती है बिना रुके उम्र ढलने तक…

चाहत की बारिशों का कोई मौसम

कौन आएगा यहाँ

कौन , आएगा यहाँ ?
कोई न आया होगा ! हमारा दरवाजा
हवाओं ने हिलाया होगा !!!

 कौन आएगा यहाँ

मोहब्बत तो हैं तुमसे

मोहब्बत तो हैं तुमसे … पर हम बोलते नहीं …

दिल ही दिल में रखते हैं… राज खोलते नहीं …

मोहब्बत तो हैं तुमसे

मुझे ढूँढने आओगे

सुनो मन ,
अगर मै कभी खो गया ,,
तब , क्या तुम मुझे ढूँढने आओगे ???

मुझे ढूँढने आओगे

काली काली साड़ी तेरी

तुम्हारे हुस्न से लीपटी हैं , काली काली साड़ी तेरी,,
मत आ जाना सामने तु , कही लग ना जाये तुझे नजर मेरी ।।।

काली  काली  साड़ी  तेरी

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