DHUNDHTE DHUNDHTE MAINE EK UMAR GUJARI

DHUNDHTE DHUNDHTE MAINE EK UMAR GUJARI

MAINE EK UMAR GUJARI

ढूँढते ढूँढते मैंनें एक उम्र गुजारी जिसको ,,

एकाएक उसे सामने देखूँ , तो मैं पागल हो जाऊँ ।

MAINE EK UMAR GUJARI

MAHFIL ME HAMARI SHAYARI

महफ़िल में जो हमारी शायरी सुनने से कतराते थे ,,

मालुम चला तन्हाइयों में वो, हमारी सभी शायरियाँ गुनगुनाते हैं …

MAHFIL ME HAMARI SHAYARI

AB KUCH NAHI BAKI HAI

अब कुछ भी नहीं बाकी है , सब कुछ खत्म हो गया ,,

वो छोड़ कर चले गए यह शहर, हम छोड़कर चले गए यह दुनिया …

AB KUCH NAHI BAKI HAI

SAB SAB KE NASIB ME NAHI

“सब” सब के नसीब में नहीं होते हैं।

काश एक दूसरे के नसीब में, हम दोनों होते …

SAB SAB KE NASIB ME NAHI

EK BAAT KAHANI THI

सुनो मन , तुमसे एक बात कहनी थी …

तुम्हे देख कर जी रहे हैं हम …

EK BAAT KAHANI THI

KAHI DIL LAGA KAR BAITHI H

बन ठन कर बैठी हैं , क्या बात है ?

दिल लगाना है या कही दिल लगा कर बैठी हैं ।

KAHI DIL LAGA KAR BAITHI H

SAD SHAYARI

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