By | 29th May 2019

वो सामने तो होते हैं

बस इतना-सा ही बाकी रह गया हैं,,ताल्लुकात उनसे…

वो सामने तो होते हैं मगर, होती नहीं बाते उनसे…

वो सामने तो होते हैं

तेरे बिन अधूरे है हम

नहीं मालुम मुझको फर्क मोहब्बत और जरुरत में …

सिर्फ इतना मालुम है , कि तेरे बिन अधूरे है हम …

तेरे बिन अधूरे है हम

किस कदर आता है प्यार तुझपे

मत पूछ किस कदर आता है प्यार तुझपे …

मन करता है होठो पर होंठ रखकर , पी जाऊँ सांस तेरी …

किस कदर आता है प्यार तुझपे

उसकी सूरत पर नज़र

उसकी सूरत पर नज़र जाती भी तो कैसे ,

मै कम्बख्त उनके झुमके पर ही दिल हार बैठा था …

उसकी सूरत पर नज़र

तुमसे मिलने की चाहत

तुमसे मिलने की चाहत कुछ एसा ।

मुसाफिर बूँद बूँद पानी के लिये तरसे जैसा ।

तुमसे मिलने की चाहत

इश्क़ का कोई वास्ता नहीँ होता

“इश्क़ का
डर से कोई वास्ता नहीँ होता…

ये उधर भी रख देता है क़दम अपने,
जिधर कोई रास्ता भी नहीँ होता …

 इश्क़ का कोई वास्ता नहीँ होता

3 Replies to “बस इतना-सा ही बाकी रह गया”

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