हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार

हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार

कोई वक़्त पे लौटाता नहीं

हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं , साहब कोई वक़्त पे लौटाता नहीं है इसलिए घाटे में हैं….

कोई वक़्त पे लौटाता नहीं

कितने भी महंगे जूते पहन लो

आज कितने भी महंगे जूते पहन लो, लेकिन वैसी फीलिंग नहीं आती, जैसी बचपन में “पुचु-पुचु” वाले जूते पहन कर आती थी..

कितने भी महंगे जूते पहन लो

मेरे पास एक ही चेहरा

मेरे पास एक ही चेहरा है , शायद इसलिए लोगों को पसंद नही आता मैं !!

मेरे पास एक ही चेहरा

नज़रों से गिरने का

पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं ” नज़रों ” से गिरने का कोई मौसम नहीं होता …

नज़रों ” से गिरने का

शरीफ चेहरे की चमक

धोखा देती है अक्सर शरीफ चेहरे की चमक…. ….काच का हर टुकडा़ हीरा नहीं होता …

शरीफ चेहरे की चमक

मत पूछो मैं कैसा हूँ

मत पूछो मैं कैसा हूँ , सदा याद रखोगे मैं वैसा हूँ …।

मत पूछो मैं कैसा हूँ

Leave a Comment