सूर्य को बहुत अभिमान था तेज चमक पर

सूर्य को बहुत अभिमान था तेज चमक पर

उसका सारा अभिमान चूर कर दिया

सूर्य को बहुत अभिमान था , अपने तेज चमक पर । बादलों ने एक झटके में उसका सारा अभिमान चूर कर दिया ।

उसका सारा अभिमान चूर कर दिया

इस मौसम की सर्द हवाएं

इस मौसम की सर्द हवाएं , न जाने कितने कितनो को बीमार करेगी , और न जाने कितने कितनो को बेकरार करेगी ।

इस मौसम की सर्द हवाएं

इस सर्दी की सुबह में

कोहरे में लिपटी इस सर्दी की सुबह में , कुनकुनी धूप सा सुकून देती हो तुम …..

इस सर्दी की सुबह में

इस मौसम में वो मज़ा कहाँ

तेरे बगैर इस मौसम में वो मज़ा कहाँ , कांटो की तरह चुभती है मुझे , ये सर्दी की रातें ….

इस मौसम में वो मज़ा कहाँ

कुछ मोहब्बत फेक रहा हूँ

सुनो… मैं कुछ मोहब्बत फेक रहा हूँ आसमां में , जब बारिश बनकर तुम्हारे शहर में गिरे तो देख लेना….।।

 कुछ मोहब्बत फेक रहा हूँ

वह सहमे से बोली

मैंने पूछा – पिछली रात ख्वाबों में क्यों नहीं आए थे ? वह सहमे से बोली – सारी रात बरसात हो रही थी !!!

वह सहमे से बोली

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