ये हवाएँ इतनी लुभावनी मत बन

ये हवाएँ इतनी लुभावनी मत बन

कहीं वो तुझसे भी नफरत न करे

ये हवाएँ इतनी लुभावनी मत बन , कहीं वो तुझसे नफरत न करने लगे।।।

कहीं वो तुझसे नफरत न

बदलना किसको कहते

मौसम की मिसाल दूँ या नाम लूँ तुम्हारा , कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं।

बदलना किसको कहते

मोहब्बत के जख्म

मोहब्बत के जख्म “किसी भी मौसम में देख सकते हो मन , मोहब्बत के जख्म हर मौसम में ताजे ही दिखेगे !!

मोहब्बत के जख्म

मुहब्बत भी बारिश जैसी होती

ये मुहब्बत भी बारिश जैसी होती है , जिसे छू लेने से•• हथेली तो गीली हो जाती है , मगर हाथ फिर भी खाली हो जाती हैं।

मुहब्बत भी बारिश जैसी होती

और हम इंतज़ार नहीं कर सकते

कब तक हम इस ठण्ड मे तडपते रहेगें …! जल्दी आ जाओ मेरी ‘मन’ , अब और हम इंतज़ार नहीं कर सकगें !

 और हम इंतज़ार नहीं कर सकते

लिपट जाओ मेरे सीने से

आओ लिपट जाओ मेरे सीने से , ये ज्येष्ट की रात है ,, कही ये गर्म हवाएं , तुम्हें बीमार ना कर दे ,,..

लिपट जाओ मेरे सीने से

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