ये कैसा असर है तेरे इश्क़ का

ये कैसा असर है तेरे इश्क़ का

तेरे इश्क़ का सनम

ये कैसा असर है ,, तेरे इश्क़ का सनम ।
सँवर कर भी रहते हैं ,, बिखरे बिखरे से हम •••।।।

तेरे इश्क़ का सनम

तुम्हारी आँखें साफ साफ बता रही

सुनो मन …
अब तो झूठ मत बोलो,, तुम्हारी आँखें साफ साफ बता रही …

ये मौहब्बत तुम्हे भी सोने नही देती …!!!

तुम्हारी आँखें साफ साफ बता रही

मेरे बिना अपनी ज़िंदगी

मेरे बिना क्या अपनी ज़िंदगी गुज़ार लोगे तुम …

इश्क़ हूँ, कोई बुखार नहीं जो दवा से उतार लोगे तुम …

 मेरे बिना अपनी ज़िंदगी

मुझे खुद नही पता

मुझे खुद नही पता था कि मैं कौन हूँ…….

बस तुम मिले और हमारा प्यार , मेरी पहचान बन गय …!!!

मुझे खुद नही पता

इश्क़ माँगा था

हम ने तो हाथ फैला कर …
इश्क़ माँगा था ,
आप ने तो हाथ चूम कर
जान ही निकाल दी …

       इश्क़  माँगा  था

दिल को सज़ा मत दे

सुनो मन …
मैं मानता हूँ , आँखों ने तुमको चाहा इतना ज़रूर ,,
पर
दिल को सज़ा मत दे …ये है बेकसूर …

 दिल को सज़ा मत दे

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