मेरी मां तो आज तक

मेरी मां तो आज तक

रोटी एक मागता हूँ दो दे देती

मेरी मां तो आज तक अनपढ़ हैं । खाते समय रोटी एक मागता हूँ तो दो लाकर दे देती हैं।

 रोटी एक मागता हूँ दो दे देती

सन्नाटा छा गया

सन्नाटा छा गया बटवारे के किस्से में । जब बुढि मां ने पूछा मैं हूँ किसके हिस्से में ।

सन्नाटा छा गया

माँ-बाप पर क्या बीतता

जब नोटों का रंग बदला तो कई लोगों की जान निकल गई। जरा सोचो जब औलाद अपना रंग बदलता है, तो माँ-बाप पर क्या बीतता हैं  !!!

माँ-बाप पर क्या बीतता

हक “मेरी माँ” को होता

मेरे किस्मत में तनिक सा भी तकलीफ नहीं होता। अगर मेरे किस्मत लिखने का हक “मेरी माँ” को होता !!!

हक “मेरी माँ” को होता

माँ की कला सबसे अनोखी होती

एक माँ की कला सबसे अनोखी होती हैं। वह एक कलाकार से भी बढ कर होती हैं, जो एक सुंदर बच्चे की रचना करती हैं।

माँ की कला सबसे अनोखी होती

माँ जितनी ताकत

एक माँ जितनी ताकत किसी में नहीं होती हैं । ना जाने एक बच्चे को जन्म देते समय कितनी दर्द सहती हैं।

माँ जितनी ताकत

One Thought to “मेरी मां तो आज तक”

  1. Informative article, just what I needed.

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