माफ़ करना आज जरा देर से आया हूँ

माफ़ करना आज जरा देर से आया हूँ

आज जरा देर से आया

माफ़ करना आज जरा देर से आया हूँ , इस मुसेरा शायरी में , आज कलम से नही दिल से लिखूंगा मैं ।।

आज जरा देर से आया

हद से ज्यादा प्यार

बेपरवाह हो जाते है वो लोग अक्सर . . जिन्हे कोई हद से ज्यादा प्यार करने लगता है ।

हद से ज्यादा प्यार

करोगे फिर मुहब्बत

बर्बाद कर के मुझे उसने पूछा , करोगे फिर मुहब्बत मुझसे ? लहू से लथपथ था दिल, मगर होंठों ने कहा…”हर वक्त”

करोगे फिर मुहब्बत

तुझे खुशी मिलती हैं

सुनो मेरी मन … अगर तुझे खुशी मिलती हैं , हम से जुदा होकर… तो दुआ हैं खुदा से, कि तुझे हम कभी ना मिले…

तुझे खुशी मिलती हैं

इतना हैरान क्यों हो रहे

मुझे खामोश देखकर इतना हैरान क्यों हो रहे हो दोस्तों , मुझे कुछ नहीं हुवा है , बस किसी पर खुद से ज्यादा भरोसा कर के धोखा खाया है…।।

इतना हैरान क्यों हो रहे

साथ बैठ कर वक़्त भी रोया

मेरे साथ बैठ कर वक़्त भी रोया एक दिन , बोलता हैं- बन्दा तू सही चल रहा है, मैं ही ख़राब चल रहा हूँ…

साथ बैठ कर वक़्त भी रोया

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