बांध देंगे आज अपने दिल को

बांध देंगे आज अपने दिल को

रोज रोज तुमसे मिलने की जिद

बांध देंगे आज अपने दिल को किसी रस्सीयों से…

कम्बख़त रोज रोज तुमसे मिलने की जिद करता रहता है …

रोज रोज  तुमसे मिलने की जिद

अपनी पूरी जिन्दगी जिया था

भीड़ में तेरा हाथ थाम कर , मैं जब तेरे संग चला था । याद है मुझे ,

उस पल मैंने अपनी पूरी जिन्दगी जिया था ।

अपनी पूरी जिन्दगी जिया था

न जाने कब से बैठो हो

न जाने कब से बैठो हो , मेरे दिल की चौखट पर ।
कौन हो तुम?
किस नगरी से आए हो, घर भी क्यू नहीं जाते, किसी भी त्यौहारों पर ।

न जाने कब से बैठो हो

हर तरफ रही खूबसूरती की चर्चा

पिछले ईद की रात , हर तरफ रही खूबसूरती की चर्चा तुम्हारी ।
शहर के लोग,
कुछ ने कहा ये चाँद है , कुछ ने कहा ये चेहरा तुम्हारी ! !

हर तरफ रही खूबसूरती की चर्चा

तुम्हारी कानों की बाली

एक तुम्हारी कानों की बाली , और एक वो तुम्हारी गर्दन पर बाईं तरफ़ की तिल ,

दोनोे की बेमिसाल जोड़ी है, जैसे हमारी और तुम्हारी … ।

तुम्हारी कानों की बाली

इश्क़ कहीं पनप रहा था

वो चुप थी , मैं ख़ामोश था ..
वो बेचैन थी , मैं बेक़रार था ..

इसी बीच हम दोनों में,
इश्क़ कहीं पनप रहा था ।

इश्क़ कहीं पनप रहा था

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