फुर्सत निकाल कर आओ कभी मेरी महफ़िल में

फुर्सत निकाल कर आओ कभी मेरी महफ़िल में

आओ कभी मेरी महफ़िल में

फुर्सत निकाल कर आओ कभी मेरी महफ़िल में ,, लौटते वक्त दिल नहीं पाओगे अपने सीने में ….

आओ कभी मेरी महफ़िल में

मोहब्बत को बीच मे लाने की

बोल दिया होता तुम्हे दर्द ही देना है , ऐ जिंदगी …. मोहब्बत को बीच मे लाने की ज़रूरत क्या थी।

मोहब्बत को बीच मे लाने की

महोब्ब्त दिल में

महोब्ब्त दिल में कुछ ऐसी होनी चाहिये…. की हासिल भले दुसरे को हो पर कमी उसको ज़िन्दगी भर अपनी होनी चाहिये…!!

महोब्ब्त दिल में

जब भी तुम ख्बाबो मे

नीँद मेँ भी गिरते है मेरी आँखो से आँसू…. जब भी तुम ख्बाबो मे मेरा हाथ छोड देती हो..!!

जब भी तुम ख्बाबो मे

ये मेरी ‘मोहब्बत’

ये मेरी ‘मोहब्बत’ और उसकी नफरत का मामला है i ए मेरे नसीब तू, बिच मेँ दखल अंदाजी मत कर…

ये मेरी ‘मोहब्बत’

जिसने महसुस किया है सच्चे प्यार

रोयेंगा वो ही जिसने महसुस किया है सच्चे प्यार को…. “वरना” मतलब कि चाहत रखने वालो को कोई फर्क नही पङता….!!!!

जिसने महसुस किया है सच्चे प्यार

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