Florence Nightingale

Florence Nightingale

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिग आन्दोलन का जन्मदाता माना जाता है। दया व सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल “द लेडी विद द लैंप” (दीपक वाली महिला) के नाम से प्रसिद्ध हैं। इनका जन्म एक समृद्ध और उच्चवर्गीय ब्रिटिश परिवार में हुआ था। लेकिन उच्च कुल में जन्मी फ्लोरेंस ने सेवा का मार्ग चुना। १८४५ में परिवार के तमाम विरोधों व क्रोध के पश्चात भी उन्होंने अभावग्रस्त लोगों की सेवा का व्रत लिया। दिसंबर १८४४ में उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं को सुधारने बनाने का कार्यक्रम आरंभ किया था। बाद में रोम के…

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Kasturba कस्तूरबा

Kasturba कस्तूरबा

Kasturba कस्तूरबा पोरबंदर के गोकुलदास और व्रजकुवर कपाडिया की पुत्री के रूप में का कस्तूरबा का जन्म हुआ। 1883 में 14 साल की कस्तूरबा का विवाह, सामाजिक परम्पराओ के अनुसार 13 साल के मोहनदास करमचंद गांधी के करवा दिया गया। उनके शादी के दिन को याद करते हुए, उनके पति कहते है की, “हम उस समय विवाह के बारे में कुछ नहीं जाते थे, हमारे लिए उसका मतलब केवल नए कपडे पहनना, मीठे पकवान खाना और रिश्तेदारों के साथ खेलना था”। क्यू की, यह एक प्रचलित परंपरा थी, ताकि किशोर…

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Dropdi द्रौपदी

Dropdi द्रौपदी

Dropdi द्रौपदी महाभारत के सबसे प्रसिद्ध पात्रों में से एक है। इस महाकाव्य के अनुसार द्रौपदी पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री है जो बाद में पांचों पाण्डवों की पत्नी बनी। द्रौपदी पंच-कन्याओं में से एक हैं जिन्हें चिर-कुमारी कहा जाता है। ये कृष्णा, यज्ञसेनी, महाभारती, सैरंध्री अदि अन्य नामो से भी विख्यात है।द्रौपदी का विवाह पाँचों पाण्डव भाईयों से हुआ था। पांडवों द्वारा इनसे जन्मे पांच पुत्र (क्रमशः प्रतिविंध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ती, शतानीक व श्रुतकर्मा) उप-पांडव नाम से विख्यात थे। प्राचीन भारत के महाकाव्य महाभारत के अनुसार द्रौपदी का…

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कमला नेहरु Kamala Neharu

कमला नेहरु Kamala Neharu

कमला नेहरु Kamala Neharu जवाहरलाल नेहरु की पत्नी और इंदिरा गांधी की माँ कमला नेहरु  का जन्म 1 अगस्त 1899 को दिल्ली में एक कश्मीरी परिवार में हुआ था | उनके पिता जवाहरलाल कौल एक साधारण व्यवसायी थे | उन दिनों लडकियों को घर से बाहर निकलने की स्वतंत्रता नही थी | उनको स्कूली शिक्षा भी नही दी जाती थी | कमला को भी घर पर ही हिंदी का साधारण ज्ञान मिल पाया था | वे देखने में बहुत सुंदर थी इसलिए मोतीलाल नेहर ने इंग्लैंड में पढ़ रहे अपने…

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बेगम हज़रत महल

बेगम हज़रत महल

NAAM ; बेगम हज़रत महल जन्म  1820 धर्म   शिया इस्लाम जन्मस्थान    फैजाबाद, अवध, भारत राष्ट्रीयता     भारतीय बच्चे   एक बेटा योगदान से मिली पहचान     महक परी लखनऊ में 1857 की क्रांति का नेतृत्व बेगम हज़रत महल ने किया था। अपने नाबालिग पुत्र बिरजिस कादर को गद्दी पर बिठाकर उन्होंनेअंग्रेज़ी सेना का स्वयं मुक़ाबला किया। उनमें संगठन की अभूतपूर्व क्षमता थी और इसी कारण अवध के ज़मींदार, किसान और सैनिक उनके नेतृत्व मेंआगे बढ़ते रहे। आलमबाग़ की लड़ाई के दौरान अपने जांबाज सिपाहियों की उन्होंने भरपूर हौसला आफज़ाई की और हाथी पर सवार होकर अपने सैनिकों केसाथ दिन-रात युद्ध करती रहीं। लखनऊ में पराजय के बाद वह अवध के देहातों में चली गईं और वहाँ भी क्रांति की चिंगारी सुलगाई। बेगम हज़रत महलऔर रानी लक्ष्मीबाई के सैनिक दल में तमाम महिलायें शामिल थीं। लखनऊ में बेगम हज़रत महल की महिला सैनिक दल का नेतृत्व रहीमी के हाथों में था, जिसने फ़ौजी भेष अपनाकर तमाम महिलाओं को तोपऔर बन्दूक चलाना सिखाया। रहीमी की अगुवाई में इन महिलाओं ने अंग्रेज़ों से जमकर लोहा लिया। लखनऊ की तवायफ हैदरीबाई के यहाँ तमाम अंग्रेज़ अफ़सर आते थे और कई बार क्रांतिकारियों के ख़िलाफ़ योजनाओं पर बात किया करते थे।हैदरीबाई ने पेशे से परे अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुये इन महत्त्वपूर्ण सूचनाओं को क्रांतिकारियों तक पहुँचाया और बाद में वह भी रहीमी केसैनिक दल में शामिल हो गयी। अंग्रेज सैनिक लगातार रेजीडेंसी से अपने साथियों को मुक्त कराने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन भारी विरोध के कारण अंग्रेजो को लखनऊ सेनाभेजना कठिन हो गया था. इधर रेजीडेंसी पर विद्रोहियों द्वारा बराबर हमले किये जा रहे थे. बेगम हजरत महल लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रो में घूम – घूमकर लोगो का उत्साह बढ़ा रही थी. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है. दिल्ली पर अंग्रेजो का अधिकार स्थापित हो चुका था. मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ़र के बंदी होते हीक्रांतकारी विद्रोहियों के हौसले कमजोर पड़ने लगे. लखनऊ भी धीरे – धीरे अंग्रेजो के नियंत्रण में आने लगा था. हैवलाक और आउट्रूम की सेनाएं लखनऊपहुँच गयी. बेगम हजरत महल ने कैसरबाग के दरवाजे पर ताले लटकवा दिए. अंग्रेजी सेनाओ ने बेलीगारद पर अधिकार कर लिया. बेगम ने अपनेसिपाहियों में जोश भरते हुए कहा ,” अब सब कुछ बलिदान करने का समय आ गया है अंग्रेजो की सेना का अफसर हैवलाक आलमबाग तक पहुँच चूका था. कैम्पवेल भी कुछ और सेनाओ के साथ उससे जा मिला. आलमबाग मेंबहुत भीड़ इकट्ठी थी. जनता के साथ महल के सैनिक, नगर की सुरक्षा के लिए उमड़ पड़े थे. घनघोर बारिश हो रही थी. दोनों ओर से तोपों की भीषण मारचल रही थी. बेगम हजरत महल को चैन नहीं था. वे चारो ओर घूम – घूम कर सरदारों में जोश भर रही थी. उनकी प्रेरणा ने क्रांतकारी विद्रोहियों में अद्भुत उत्साह का संचार किया. वे भूख प्यास सबकुछभूलकर अपनी एक – एक इंच भूमि के लिए मर – मिटने को तैयार थे. 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सन 1857-58 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, राजा जयलाल सिंह के नेतृत्व में बेगम हज़रात महल के समर्थकों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडियाकंपनी के सेना के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और लखनऊ पर कब्ज़ा कर लिया। लखनऊ पर कब्ज़े के बाद हज़रात महल अपने नाबालिग पुत्र बिरजिसकादर को अवध की गद्दी पर बिठा दिया। इसके पश्चात जब कंपनी की सेना ने लखनऊ और अवध के ज्यादातर भाग पर फिर से कब्ज़ा जमा लिया तबबेगम हज़रत महल को पीछे हटना पड़ा। इसके पश्चात उन्होंने नाना साहेब (पेशवा, जिन्होंने कानपुर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व  किया) के साथ मिलकर काम किया औरफिर फैजाबाद के मौलवी के साथ मिलकर शाहजहाँपुर आक्रमण को अंजाम दिया। उन्होंने अंग्रेजों पर हिन्दुओं और मुसलमानों के धर्म में दखलंदाजीकरने का आरोप लगाया। स्मारक बेगम हज़रत महल का मकबरा काठमांडू के मध्य जामा मस्जिद के पास (घंटाघर पर) स्थित है। यह स्थान दरबार मार्ग से ज्यादा दूर नहीं है।इसकी देख-भाल जामा मस्जिद केन्द्रीय समिति करती है। 15 अगस्त 1962 को बेगम हज़रत महल के सम्मान में लखनऊ स्थित हजरतगंज के ‘ओल्ड विक्टोरिया पार्क’ का नाम बदलकर ‘बेगम हज़रतमहल पार्क’ कर दिया गया। नाम बदलने के साथ-साथ यहाँ एक संगमरमर का स्मारक भी बनाया गया। बेगम हज़रत महल पार्क में रामलीला, दशहराऔर लखनऊ महोत्सव जैसे समारोहों का आयोजन होता है। 10 मई 1984 को भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। A.      लखनऊ में ‘1857 की क्रांति’ का नेतृत्व बेगम हज़रत महल ने किया था। अपने नाबालिग पुत्र बिरजिस कादर को गद्दी पर बिठाकर उन्होंने अंग्रेज़ीसेना का स्वयं मुक़ाबला किया।   B.      7 जुलाई 1857 से अवध का शासन हजरत महल के हाथ में आया।   C.      1857 में मंगल पांडे के विद्रोह के बाद क्रांति मेरठ तक फ़ैली। मेरठ के सैनिक दिल्ली के बादशाह बहादुर शाह से मिले। बहादुर शाह और ज़ीनत महलने उनका साथ दिया और आजादी की घोषणा की।   D.      बेगम हजरत महल ने हिन्दू, मुसलमान सभी को समान भाव से देखा। अपने सिपाहियों का हौसला बढ़ाने के लिये युद्ध के मैदान में भी चली जाती थी।बेगम ने सेना को जौनपुर और आजमगढ़ पर धावा बोल देने का आदेश जारी किया लेकिन ये सैनिक आपस में ही टकरा ग़ये।   E.       ब्रितानियों ने सिखों व राजाओं को ख़रीद लिया व यातायात के सम्बंध टूट गए। नाना की भी पराजय हो गई। 21 मार्च को लखनऊ ब्रितानियों केअधीन हो गया। अन्त में बेगम की कोठी पर भी ब्रितानियों ने कब्जा कर लिया।   F.       बेगम हज़रत महल में संगठन की अभूतपूर्व क्षमता थी और इसी कारण अवध के ज़मींदार, किसान और सैनिक उनके नेतृत्व में आगे बढ़ते रहे। G.     आलमबाग़ की लड़ाई के दौरान अपने जांबाज सिपाहियों की उन्होंने भरपूर हौसला आफज़ाई की और हाथी पर सवार होकर अपने सैनिकों के साथदिन-रात युद्ध करती रहीं।

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kIRAN BEDI किरण बेदी

kIRAN BEDI किरण बेदी

kIRAN BEDI किरण बेदी का जन्म 9 जून 1949 को अमृतसर में, पिता प्रकाशलाल पेशावरिया तथा माँ प्रेमलता के घर में हुआ था । किरण बेदी ने स्कूल से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई अमृतसर में ही की । उन्होंने पोलेटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री पंजाब यूनिवर्सिटी से प्राप्त की । दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने कानून की डिग्री LLB ली और वर्ष 1993 में उन्हें आई.आई.टी. दिल्ली के सोशल साइंस विभाग से इसी विषय में पी.एच.डी. (डाक्ट्रेट) की उपाधि मिली । अपनी पढ़ाई के दौरान किरण बेदी एक मेधावी छात्रा…

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ईशा मुकेश अम्बानी

ईशा मुकेश अम्बानी

ईशा मुकेश अम्बानी isha ambani (जन्म-२३ अक्टूबर,१९९१) एक भारतीय व्यावसायिक है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी औररिलायंस फाउंडेशन के संस्थापक नीता अंबानी की बेटी हैं। येल विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और दक्षिण एशियाई अध्ययन में स्नातक होने के बाद, अक्टूबर २०१४ में उन्हें जिओ औररिलायंस रिटेल के निदेशक मंडल में शामिल किया गया था। २००८ में अम्बानी को ४७१ करोड़ रुपये के नेट वर्थ के साथ उन्हें फोर्ब्स की सबसे युवा अरबपति हेनेर्स की सूची में स्थान दियाथा। २०१५ में एशिया की १२ शक्तिशाली…

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PRIYANKA GANDHI प्रियंका गाँधी

PRIYANKA GANDHI प्रियंका गाँधी

PRIYANKA GANDHI प्रियंका गाँधी वाड्रा  एक भारतीय राजनितिज्ञ हैं। वे नेहरू-गाँधी परिवार से है, और फ़िरोज़ गाँधी तथा इंदिरा गाँधी की पोती हैं। प्रियंका वाड्रा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी की दूसरी संतान है। उनकी दादी इंदिरा गाँधी और परदादा जवाहरलाल नेहरू भी भारतीय प्रधानमंत्री रहे हैं। उनके दादा फ़िरोज़ गाँधी एक जाने-माने संसद सदस्य थे और उनके परदादा, मोतीलाल नेहरू भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्त्वपूर्ण नेता थे। प्रियंका ने अपनी स्कूली शिक्षा मॉडर्न स्कूल, कान्वेंट ऑफ़ जीसस एंड…

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सुषमा स्वराज Sushama Swaraj

सुषमा स्वराज Sushama Swaraj

सुषमा स्वराज Sushama Swaraj (जन्म : १४ फरवरी १९५२) एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और भारत की विदेश मंत्री हैं। वे वर्ष 2009 में भारत की भारतीय जनता पार्टी द्वारा संसद में विपक्ष की नेता चुनी गयी थीं, इस नाते वे भारत की पन्द्रहवीं लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता रही हैं। इसके पहले भी वे केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में रह चुकी हैं तथा दिल्ली की मुख्यमन्त्री भी रही हैं। वे सन २००९ के लोकसभा चुनावों के लिये भाजपा के १९ सदस्यीय चुनाव-प्रचार-समिति की अध्यक्ष भी रहीं थीं। अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा…

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नादिया मुराद THE LAST GIRL

नादिया मुराद THE LAST GIRL

नादिया मुराद उत्तरी इराक के निनेवेह प्रांत में सीरिया की सीमा से लगे सिंजार के कोचो गांव की रहने वाली और यजीदी अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाली नादिया को तीन साल पहले 2014 में सुन्नी कट्टरपंथी संगठन IS ने बंधक बना लिया था. उस समय मुराद की उम्र 21 वर्ष थी. IS के आतंकवादी मुराद से सेक्स स्लेव का काम लेते थे, मतलब IS के लड़ाके उनसे अपनी हवस की भूख शांत करते थे. मुराद किसी तरह IS के कब्जे से भागने में सफल रहीं और अब वह जर्मनी में…

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नारी शक्ति हमारे समाज के लिए एक अहम ताकत है …समय समय पर महिलाओ ने भी पुरुषों कि तरह दुश्मनों से लोहा लिया है …और हमारे समाज को भयमुक्त बनाने में मदद किया है …