KHUDIRAM BOSE

KHUDIRAM BOSE

जन्म: 3 दिसंबर, 1889, हबीबपुर, मिदनापुर ज़िला, बंगाल मृत्यु: 11 अगस्त, 1908, मुजफ्फरपुर कार्य: भारतीय क्रन्तिकारी भारत विरो की भूमि हैं, यहाँ हर पल कई वीर जन्म लेते हैं। जिनमे से कुछ वीर बहुत कम ज़िन्दगी जी पाते हैं, मगर उन्ही कम समयों में ही बहुत कुछ बड़ा कर जाते हैं। जिन्हें हर पल सारा भारतवर्ष याद करता है। भारत के स्वाधीनता संग्राम का इतिहास महान वीरों और उनके सैकड़ों साहसिक कारनामों से भरा पड़ा है। ऐसे ही क्रांतिकारियों की सूची में एक नाम खुदीराम बोस का है। खुदीराम बोस एक भारतीय युवा…

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हुमायूँ मुगल शासक

हुमायूँ मुगल शासक

हुमायूँ एक महान मुगल शासक थे। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर के पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ (६ मार्च १५०८ – २२ फरवरी, १५५६) थे। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है। बाबर की मृत्यु के पश्चात हुमायूँ ने १५३० में भारत की राजगद्दी संभाली और उनके सौतेले भाई कामरान मिर्ज़ा ने काबुल और लाहौर का शासन ले लिया। बाबर ने मरने से पहले ही इस तरह से राज्य को बाँटा ताकि आगे चल कर दोनों भाइयों में लड़ाई न…

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महाराजा रणजीत सिंह

महाराजा रणजीत सिंह

महाराजा रणजीत सिंह ;- सिख शासन की शुरुवात करने वाले रणजीत सिंह ने उन्नीसवी सदी में अपना शासन शुरू किया, उनका शासन पंजाब प्रान्त में फैला हुआ था और उन्होने दल खालसा नामक एक संगठन का नेतृत्व किया था. उन्होने छोटे गुटों में बंटे हुए सिखों को एकत्रित किया. उनके बाद उनके पुत्र खड़ग सिंह ने सिख शासन की कमान संभाली. महाराजा रणजीत सिंह ने मिसलदार के रूप में अपना लोहा मनवा लिया था और अन्य मिसलदारों को हरा कर अपना राज्य बढ़ाना शुरू कर दिया था. पजाब क्षेत्र के…

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समुद्रगुप्त गुप्त राजवंश

समुद्रगुप्त गुप्त राजवंश

समुद्रगुप्त (राज 335-380) गुप्त राजवंश के चौथे राजा और चन्द्रगुप्त प्रथम के उत्तरधिकरी थे। वे भारतीय इतिहास में सबसे बड़े और सफल सेनानायक में से एक माने जाते है। समुद्रगुप्त, गुप्त राजवंश के तीसरे शासक थे, और उनका शासनकाल भारत के लिये स्वर्णयुग की शुरूआत कही जाती है। समुद्रगुप्त को गुप्त राजवंश का महानतम राजा माना जाता है। वे एक उदार शासक, वीर योद्धा और कला के संरक्षक थे। उनका नाम जावा पाठ में तनत्रीकमन्दका के नाम से प्रकट है। उसका नाम समुद्र की चर्चा करते हुए अपने विजय अभियान…

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महाराजा हरिश्चन्द्र

महाराजा हरिश्चन्द्र

महाराजा हरिश्चन्द्र ;- सत्य की चर्चा जब भी कही जाएगी, महाराजा हरिश्चन्द्र का नाम जरुर लिया जायेगा. हरिश्चन्द्र इकक्षवाकू वंश के प्रसिद्ध राजा थे. कहा जाता है कि सपने में भी वे जो बात कह देते थे उसका पालन निश्चित रूप से करते थे | इनके राज्य में सर्वत्र सुख और शांति थी. इनकी पत्नी का नाम तारामती तथा पुत्र का नाम रोहिताश्व था. तारामती को कुछ लोग शैव्या भी कहते थे. Maharaja Harishchandra की सत्यवादिता और त्याग की सर्वत्र चर्चा थी. महर्षि विश्वामित्र ने हरिश्चन्द्र के सत्य की परीक्षा…

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शाहजहाँ मुग़ल शहंशाह

शाहजहाँ मुग़ल शहंशाह

शाहजहाँ पांचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिये विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया। सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था। 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के…

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समाज सुधारक राजा राममोहन राय

समाज सुधारक राजा राममोहन राय

            समाज सुधारक राजा राममोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत और आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है। भारतीय सामाजिक और धार्मिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में उनका विशिष्ट स्थान है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल में नव-जागरण युग के पितामह थे। उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम और पत्रकारिता के कुशल संयोग से दोनों क्षेत्रों को गति प्रदान की। उनके आन्दोलनों ने जहाँ पत्रकारिता को चमक दी, वहीं उनकी पत्रकारिता ने आन्दोलनों…

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राजा पुरुवास या राजा पोरस के जीवनगाथा

राजा पुरुवास या राजा पोरस के जीवनगाथा

राजा पुरुवास या राजा पोरस का राज्य पंजाब में झेलम से लेकर चेनाब नदी तक फैला हुआ था। वर्तमान लाहौर के आस-पास इसकी राजधानी थी। राजा पोरस (राजा पुरू भी) पोरवा राजवंश के वशंज थे, जिनका साम्राज्य पंजाब में झेलम और चिनाब नदियों तक (ग्रीक में ह्यिदस्प्स और असिस्नस) और उपनिवेश ह्यीपसिस तक फैला हुआ था।। राजा पोरस (King Porus) और सिकन्दर की कहानी काफी मशहूर है जिसे ना केवल एतेहासिक लेखो में बल्कि लोगो की जुबान पर भी इनके बीच हुए युद्ध की कहानी याद  है | यूनानी इतिहास…

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पेशवा बाजीराव Peshawa Bajirao

पेशवा बाजीराव Peshawa Bajirao

पेशवा बाजीराव Peshawa Bajirao बाजीराव का जन्म ब्राह्मण परिवार में बालाजी विश्वनाथ के पुत्र के रूप में कोकणस्थ प्रान्त में हुआ था, जो छत्रपति शाहू के प्रथम पेशवा थे। २० वर्ष की आयु में उनके पिता की मृत्यु के पश्यात शाहू ने दुसरे अनुभवी और पुराने दावेदारों को छोड़कर बाजीराव को पेशवा के रूप में नियुक्त किया। इस नियुक्ति से ये स्पष्ट हो गया था की शाहू को बाजीराव के बालपन में ही उनकी बुद्धिमत्ता का आभास हो गया था। इसलिए उन्होंने पेशवा पद के लिए बाजीराव की नियुक्ति की।…

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एक सच्चे और ईमानदार नेता की बाते

एक सच्चे और ईमानदार नेता की बाते

एक सच्चे और ईमानदार नेता की बाते … मैं मंच पर खड़े होकर सामने बहुत बड़ी भीड़ से चीख चीख कर कह रहा था , की अगर इस बार हमारी सरकार बनेगी तो हरेक शख्श के जिंदगी में उनके हिस्से की सुकून मिलेगी … जिसमे आमदनी कम , मगर खुशिया ज्यदा होगी … किसी चीज़ के उत्पादन में मशीने कम , हाथे ज्यदा होगी … नए नए खोजे कम , बस पुरानी कलाए ताज़ा होगी … जुआरी , शराबखाने , आद्धेबजी ये सब बंद ,, बस चारो तरफ स्कूल ,…

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प्रभावशाली जिवनी , ऐसे शख्श जिन्होंने अपने कारनामे से खुद को और समाज को एक नई दिशा दिखाई … जो वक्त वक्त पर लोगो को समाज के लिए जागरूक किए… जिनके बलबूते और उनकी सच्ची मेहनत की वजह से देश व समाज का नाम पुरे विश्व में जाना जता है ..ऐसे ही प्रतिभावान और प्रभावशाली लोगो की हमारे समाज को जरुरत है ….