By | 11th April 2019

जहाँ दीवारे उदास लगे

“”निशानी क्या बताऊ तुझे अपने घर की , जहाँ दीवारे उदास लगे वहीँ चले आना””

जहाँ दीवारे उदास लगे

भीगने का वादा तो करो

तुम भीगने का वादा तो करो , ए जान …, बारिश मैं लेकर आऊंगा..

भीगने का वादा तो करो

तुम्हे देख कर

मैं पागल नही हूँ.. बस तुम्हे देख कर ,,,, मेरे दिल का दिमाग खराब हो जाता है..

तुम्हे देख कर


ये नादान दिल मेरा

इश्क की अदालत में हार मेरी लाज़िमी थी….. ये नादान दिल मेरा , पैरवी उसकी करता रहा……

ये नादान दिल मेरा

हम उसे इतना चाहते

कुछ तो बात होगी उसमें , तभी तो हम उसे इतना चाहते है। पर बता नहीं सकते ….

 हम उसे इतना चाहते

तुझे याद करके रोता हूँ

कब तक आँख मैं कचरा चले जाने का बहाना बनाता रहूँ.. लो आज सरे आम कहता हूँ मैं तुझे याद करके रोता हूँ… !!

तुझे याद करके रोता हूँ

7 Replies to “निशानी क्या बताऊ तुझे अपने घर की”

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