By | 19th April 2019

मोहब्बत पर इतना गुमान है

नादान दिल तू समझता क्यों नहीं है । अगर तुम्हें मोहब्बत पर इतना ही गुमान है , तो कहता क्यों  नहीं । आखिर कब तक अकेले दर्द सहते रहोगो , अगर तुम्हारी तरह उसका भी दिल है , तो पिघलता क्यों नहीं ।

 मोहब्बत पर इतना गुमान है

दिल निकाल कर

दिल निकाल कर टांग दिया है खूंटी में । अंदर टूटा हुआ बिखरा था, तो बहुत चुभ रहा था।

दिल निकाल कर

मैंने देखा आज एक ख्वाब

मैंने देखा आज एक ख्वाब , जिसमें अपनी जिंदगी को देखा अपने साथ । थोड़ी शर्माइ हुई थोड़ी घबराई हुई थी। बातचीत करने के लिए मूड बनाई हुई थी।

मैंने देखा आज एक ख्वाब

ढूढंता क्यों नहीं उसके दिल में

दिल, आखिर तू कब तक लुका छूपी खेलता रहेगा उसके दिल में । एक बार जाकर खुद को ढूढंता क्यों नहीं उसके दिल में । कहीं तू है भी या नहीं ।

ढूढंता क्यों नहीं उसके दिल में

अपने लिए अजनबी हूं,

मैं खुद भी अपने लिए अजनबी हूं , मगर तुमसे जाना पहचाना सा लगता हूँ।

अपने लिए अजनबी हूं,

मिलने का वादा

तुम मिलने का वादा तो करो, . ए मन , . समय मैं लेकर आऊंगा..

मिलने का वादा

One Reply to “नादान दिल तू समझता क्यों नहीं है”

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