दुखों से कह दो बान्ध ले अपना सामान

दुखों से कह दो बान्ध ले अपना सामान

किसी के घर में नहीं रहना चाहिए

दुखों से कह दो , कि बान्ध ले अपना सामान … और चले जाए । ज्यादा दिन तक किसी के घर में नहीं रहना चाहिए !!!

किसी के घर में नहीं रहना चाहिए

लोग कहाँ अपना खुदा ढुंढ रहे

पूजा मेँ , नमाजो मे , भजन मेँ , ये लोग कहाँ अपना खुदा ढुंढ रहे है ! पहलेँ तो पैसों के लोभ मेँ खो दीया खुद को , आईने मेँ अब अपना पता ढुंढते है |

लोग कहाँ अपना खुदा ढुंढ रहे

इस जहां को अपना समझने लगे

आजकल लोग अपने विचार कम और हैसियत ज्यादा दिखाने लगे हैं। इस जहां को अपना समझने लगे हैं ।

इस जहां को अपना समझने लगे

गाँव में शहर में

गाँव में देखा किसानों को खेती करते हुए , बाप रे कितना मेहनत करते है । शहर में देखा लोगों को , बड़ी आसानी से अनाज बर्बाद करते है।

 गाँव में शहर में

ठीक ही कहा है किसी न

ठीक ही कहा है किसी न , गरीब का देवता भी गरीब ही होता हैं …

ठीक ही कहा है किसी न

जरूरी नहीं हर दिन अच्छा हो

जरूरी नहीं कि हर दिन हमारा अच्छा हो । बल्कि जरूरी यह है कि , हर दिन हमारा कुछ न कुछ अच्छा हो …

जरूरी नहीं कि हर दिन हमारा अच्छा हो

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