By | 2nd April 2019

दर्द भरी प्यार कि एक कहानी

सुनो ।
कौन ?
मैं !
मैं कौन ?
अच्छ ! अब मेरी आवाज भी नहीं पहचानते ?
तुम ही तो थे , जो कालेज तक एक सिक्युरिटी गार्ड की तरह चुपचाप मुझे छोड़ने जाते थे।
बहाने बनाकर मेरे कालेज के आसपास मडराते थे ।
मेरी सहेलियाँ मुझे छेड़ती थी , मैं बार बार उन्हें कहता था कि नहीं जानती ।
मैं ? ऐसा करता था ? अरे बाप रे !
और कौन ! बहाने से मेरे छोटे भाई से दोस्ती भी कर लिए थे और घर तक भी पहुंच गए थे।
मेरी एक झलक पाने के लिए बड़ी देर तक बात चीत करते रहते थे।
फिर चाय की चुस्कियों के बीच मेरी हसी तुम्हारे कानों में गुन्जती थी।
अरे ! तुम्हें तो सारा कुछ ठीक से याद है।
हा , बिलकुल ! कैसे याद नहीं रहेंगी !
फिर तुम्हारे लिए लड़की की तलाश शुरू हो गई और तुम गुमसुम से रहने लगे थे। पर उससे पहले मेरी ही शादी हो गई।
एक प्यार की कहानी यू ही कहीं चुपचाप खो गई ।
वैसे , कितने वर्ष बीत गए तुम कहाँ हो ? और कहाँ से बोल रही हो ?
तुम्हारी आत्मा से ! जब जब तुम उदास और तन्हा महसूस करते हो , तब तब मैं तुम्हारे पास ही होती हूँ !
बाय ! खुश रहा करो , जो बीत गया सो बीत गया …….
कोशिश तो करता हूँ खुश रहने की , पर दिल मानता ही नहीं । वैसे बाय ! तुम खुश रहना ……..

One Reply to “दर्द भरी प्यार कि एक कहानी”

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