किसी दिन गुजरे मेरी गलियों से

किसी दिन गुजरे मेरी गलियों से
किसी दिन गुजरे मेरी गलियों से 

 

रोज घंटों खड़ा होकर देखता रहता हूँ

अपनी बालकनी से ,,,
किसी भी दिन तो वह गुजरे ,

कभी मेरी गलियों से …।।।

Leave a Comment