By | 4th August 2019

ठिकाना मालूम है इस दिल को

किसी भी तरह, तुम तक पहुंच ही जाता हैं यह दिल ,, चाहे इसे जितना भी बहलाऊं…
ठिकाना अपना मालूम है, जो इस दिल को …

 ठिकाना मालूम है इस दिल को

कैसे एक एक पल बीतता है

सुनो “मन”, तुम पूछ लेना सुबह से, न यकीन हो तो शाम से…

कि कैसे एक एक पल बीतता है,, सिर्फ इस दिल का तुम्हारे नाम से ।

कैसे एक एक पल बीतता है

दर्द मेरे बिलकुल पास था

इश्क़ को एकदम, अपने करीब से गुजरते हुए देखा …

यकीनन दर्द मेरे बिलकुल पास था …

दर्द मेरे बिलकुल पास था

फिलहाल मेरा दिल बेचैन है

कुछ याद आया तो और लिखेगें जरुर, फिर कभी ,,

फिलहाल मेरा दिल बेचैन है, उनकी तस्वीर देखकर ।।।

फिलहाल मेरा दिल बेचैन है

तू अपनी हाथ मुझे थमा दे

सोचता हूँ “मन” कि ,
चूड़िया बेचने आऊं तेरे
मौहल्ले मे ,,
क्या पता इसी बहाने तू
अपनी हाथ मुझे थमा दे ।

  तू अपनी हाथ मुझे थमा दे

एक बार और देख कर

एक बार और देख कर .. मुझे थोड़ी सुकून दे दे …

मैं आज भी तड़प रहा …उस जैसी पहली मुलाकत के लिए …

एक बार और देख कर

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