उसे कहेना के तेरी याद बहुत आती

उसे कहेना के तेरी याद बहुत आती

तेरी याद बहुत आती

उसे कहेना के तेरी याद बहुत आती है……!! ये भी कहेना कोई ओर नहीं है मेरा…..!!!!

तेरी याद बहुत आती

मेरी तन्हाईयाँ फिर से

लो, “शाम” हो गई.. मेरी तन्हाईयाँ फिर से तेरे नाम हो गई…

मेरी तन्हाईयाँ फिर से

मैं तो रोज़ ही

सुनो मैं तो रोज़ ही “”रोज़े”” रख लूँ…!! मगर शर्त है तुम “”चाँद”” बन जाओ —

मैं तो रोज़ ही

ना जाने क्यूँ एहसास सा है

हो दूर कितना भी , पर ना जाने क्यूँ एहसास सा है , तू मेरे पास , बहुत पास , बहुत पास सा है…………

 ना जाने क्यूँ एहसास सा है

दीवाना हूँ उस का…

एक वो है जो नजर अंदाज़ करती है मुझ को ,, एक मै हूँ जो दिल-ओ-जान से दीवाना हूँ उस का…

 दीवाना हूँ उस का…

नसीब भी होना चाहिए

सिर्फ बेहद चाहने से क्या होता है नसीब भी होना चाहिए किसी का प्यार पाने के लिए —

नसीब भी होना चाहिए

Leave a Comment