इश्क़ एक खूबसूरत एहसास है

इश्क़ एक खूबसूरत एहसास है

इस एहसास को समेटना चाहता

इश्क़ एक खूबसूरत एहसास है “मन” ,

और मैं इस एहसास को समेटना चाहता हूँ।

इस एहसास को समेटना चाहता

ऐ “मन” तू क्यों रोता

ऐ “मन” तू क्यों रोता है …

ये दुनिया है , यहाँ तो हरपल ऐसा ही होता है…

ऐ "मन" तू क्यों रोता

वो बातें करना चाहते

मेरी आँखो ने पकड़ा है, उन्हे कई दफा रंगे हाथ ,

वो मुझसे बातें करना तो चाहते है , मगर घबराते बहुत है …

 वो बातें करना चाहते

दिल के ज्ख्मो पर

दिल के ज्ख्मो पर किसी की नज़र नहीं !!!

हम मर चुके हैं तुझ पर, और तुझे ही ख़बर नहीं !!!

दिल के ज्ख्मो पर

समझा रहा हूं दिल को

समझा रहा हूं दिल को सुबह से ही कि…

शाम तो होने दे… वो बाँहों की हथकड़ी अपनी ही है…

समझा रहा हूं दिल को

मोहब्बत का कोई क़ुसूर नहीं

इसमे मोहब्बत का कोई क़ुसूर नहीं, उसे तो मुझसे रूठना ही था ,,

दिल मेरा मिट्टी सा खिलौना और खिलौने का अंजाम तो टूटना ही था…!!!

मोहब्बत का कोई क़ुसूर नहीं

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