By | 2nd April 2019

आज हमारी पृथ्वी की हकीकत

 हमारी पृथ्वी की हकीकत

” हमारी पृथ्वी ” यह नाम हम इंसानों ने ही दिया है। वैसे तो इसका ना सिर्फ ” पृथ्वी ” हैं ।
जो कुशल , सहनशील , मजबूत , पालनकर्ता हैं। मगर अब यह दिनों दिन एक अबला व कमजोर नारी बन गई हैं। मगर इसमें हौसले अब भी वहीं के वहीं बुलन्द हैं।
भला इसने कभी ऐसा सोची भी नहीं होगी कि भविष्य में मेरा जीवन ऐसी भी होगी।
हम इंसानों ने इस पर ऐसा रौब दिखा रहे हैं जैसे यह हमारी कोई दासी है। मगर सच कहें तो हम इंसान ही इस पृथ्वी की दासी है।
दिनों दिन हम इंसानों ने इस पृथ्वी को खोखला करते जा रहे हैं , और लोगों से कहते फिर हैं कि हमने तरक्की कर लिया , हमने तरक्की कर लिया .. .
मगर पृथ्वी चुपचाप सब सह रही हैं।
हम इंसानों ने नए नए घातक खोजे करकर , और विनाशकारी परमाणु हथियार जैसी बमों को पृथ्वी की छाती पर रखकर हम परीक्षण कर रहे हैं। न जाने कितनी बार यह लहूलुहान होती होगी ।
मगर फिर भी सब सह रही हैं।
बस कभी कभी थोड़े गुस्से में आकर अपना छोटा सा जलवा दिखा देती हैं। मगर हम इंसान उसके छोटे से जलवे को साधारण समझ बैठते हैं। और हम अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं।
आज भी यह पृथ्वी हमारे द्वारा दी जाने वाली हर याचनाओ को बड़ी आसानी से झेल रही हैं ।
मगर अब वह समय दूर नहीं , जब पृथ्वी अपनी रौद्र रुप दिखलाएगी , और पल भर में ही खुद को ताकतवर समझे इंसानों को चट कर जाएगी ……


SAVE THE EARTH

7 Replies to “आज हमारी पृथ्वी की हकीकत”

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