आज वो अचानक रस्ते में मिली थी मुझे

आज वो अचानक रस्ते में मिली थी मुझे

आज वो अचानक रस्ते में मिली थी मुझे ,

 

आज वो अचानक रस्ते में मिली थी मुझे ,

मैं देखता रहा उसे , वो देखती रही मुझे ….

उसकी नजरो में नहीं थी , कोई घबराहट ,,

मैं जनता था , वर्षों से मोहब्बत वो करती थी मुझे …..

फिर न जाने एकाएक क्या हुआ ,

सब कुछ एक दफा में ही रूठ गया ….

बिछड़कर मुझसे दूर चली गई ऐसे ,,

कोई नाता ही न हो हमारा जैसे ….

तलाश ना कर सकी ,

फिर वहाँ जाकर मुझे ,,

जहाँ गलत समझकर ,

उसने छोड़ दिया था मुझे ….

सारे अरमान बिखर चुके थे मेरे ,

फिर उसकी मीठी मीठी खवाबो ने ,

सहारा दिया था मुझे ….

अक्सर वो मिला करती थी खवाबो में मुझे ,

मैं ढूंढता रहता था ,दिन के उजालो में उसे ….

पागलो कि तरह हो जाता ,

जब कही नहीं दिखती थी वो मुझे ……

आज वो अचानक रस्ते में मिली थी मुझे ….

 

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