By | 28th February 2019

अमित शाह का जन्म 1964 में मुंबई के एक संपन्न गुजराती परिवार में हुआ।

        सोलह वर्ष की आयु तक वह अपने पैत्रक गांव मान्सा, गुजरात में ही रहे और वहीँ स्कूली शिक्षा प्राप्त की। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उनका परिवार अहमदाबाद चला गया। बालपन में वह सदैव महान राष्ट्रभक्तों की जीवनियों से प्रेरित हुआ करते थे, इसी प्रेरणा के फलस्वरूप उन्होंने भी मातृभूमि की सेवा करने और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का स्वप्न देखा। वह विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीयवादी भावना तथा उनके दृष्टांत से प्रेरित व प्रभावित हुए तथा अहमदाबाद में संघ के एक सक्रिय सदस्य बन गए। यह कदम उनके जीवन का एक ऐसा कदम था जिसने उनका जीवन सदा के लिए परिवर्तित कर दिया एवं उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की प्रभावशाली यात्रा की और उन्मुख किया।

        राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल होने के बाद अमित भाई ने संघ की विद्यार्थी शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) के लिए चार वर्ष तक कार्य किया। उसी अवधी में भाजपा, संघ की राजनितिक शाखा बन कर उभरी और अमित भाई 1984-85 में पार्टी के सदस्य बने। भाजपा सदस्य बनने के बाद उन्हें अहमदाबाद के नारायणपुर वार्ड में पोल एजेंट का पहला दायित्वा सौंपा गया, तत्पश्चात् वह उसी वार्ड के सचिव बनाए गए। इन कार्यो को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्हें उच्चतर दायित्वों हेतु चुना गया और भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया

       AMIT SHAH ने सरखेज उपचुनाव से जो विजय यात्रा आंरभ की अनवरत् 1998, 2002 ओर 2007 में उसी क्षेत्र से विजय हासिल कीसरखेज की जनता ने सर माथे पर बैठाया। तथा 2012 में नरनपुरा विधानसभा क्षेत्र से भी विधायक चुने गये। 2003 से 2012 तक आपनेगुजरात में गृह मंत्रालय संभाला और प्रदेश में कानून व्यवस्था को इस तरह संभाला कि हर वर्ष परंपरागत ढंग से होने वाले फसाद की दुखदयादे आम आदमी के मानस पटल से तिरोहित हो गयी। आम आदमी को जगन्नाथ यात्रा, होली, दिवाली, ईद, रमजान के पर्वो में गंगा जमुनीसंस्कृति की अनुमति होने लगी। पर्वो को गरिमा प्रदान की। गेंहू के साथ घुन भी पिस जाता है, यह कहावत राजनीति में अक्षरशः चरितार्थहोती है और अमित शाह भी अपवाद नहीं रहे। ध्येय निष्ठा और कड़े अनुशासन प्रियता के कारण गुजरात के तत्कालीन मुुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदीतथाकथित धर्म निरपेक्षतावादी लाबी का शिकार बने।

       Amit Shah को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। 2004 में हुई मुठभेड़ में इशरत जहां, जीशान जोहर, अमजद अली राणा केसाथ प्राणेश मारे गये थे। इन्हें अवांछित तत्व माना जाता था, तब इस मुठभेड़ का असल प्रयोजन इस गिरोह पर नरेन्द्र मोदी की हत्या काषड़यंत्र रचने और क्रियान्वित करनें की मंशा से आना बताया गया था, जो सत्य के निकट था।

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

        शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को महाराष्ट्र के मुंबई में एक व्यापारी के घर हुआ था। वे गुजरात के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखते है। उनका गाँव पाटण जिले के चँन्दूर मे है। मेहसाणा में शुरुआती पढ़ाई के बाद बॉयोकेमिस्ट्री की पढ़ाई के लिए वे अहमदाबाद आए, जहां से उन्होने बॉयोकेमिस्ट्री में बीएससी की, उसके बाद अपने पिता का बिजनेस संभालने में जुट गए। राजनीति में आने से पहले वे मनसा में प्लास्टिक के पाइप का पारिवारिक बिजनेस संभालते थे। वे बहुत कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। 1982 में उनके अपने कॉलेज के दिनों में शाह की मुलाक़ात नरेंद्र मोदी से हुयी। 1983 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और इस तरह उनका छात्र जीवन में राजनीतिक रुझान बना।

व्यक्तिगत जीवन

        शाह का विवाह सोनल शाह से हुई, जिनसे उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिनका नाम जय है। वे अपनी माँ के बेहद करीब थे जिनकी मृत्यु उनकी गिरफ्तारी से एक माह पूर्व 8 जून 2010 को एक बीमारी से हो गयी।

राजनीतिक करियर

        अमित शाह 1986 में भाजपा में शामिल हुये। 1987 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का सदस्य बनाया गया। शाह को पहला बड़ा राजनीतिक मौका मिला 1991 में, जब आडवाणी के लिए गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला। दूसरा मौका 1996 में मिला, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात से चुनाव लड़ना तय किया। इस चुनाव में भी उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला।

        पेशे से स्टॉक ब्रोकर अमित शाह ने 1997 में गुजरात की सरखेज विधानसभा सीट से उप चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 1999 में वे अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (एडीसीबी) के प्रेसिडेंट चुने गए। 2009 में वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने। 2014 में नरेंद्र मोदी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। 2003 से 2010 तक उन्होने गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृहमंत्रालय का जिम्मा संभाला।

Heart tenant

Riste nibhate raho , ek din apke Ristedar v Riste nibhane lagenge …

विवाद

        2008 में अहमदाबाद में हुए बम ब्‍लास्‍ट मामले को 21 दिनों के भीतर सुलझाने में उन्होंने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बम ब्‍लास्‍टमें 56 लोगों की मृत्‍यु हो गई थी और 200 से ज्‍यादा लोग जख्‍मी हुए थे। उन्‍होंने राज्‍य में और अधिक बम ब्‍लास्‍ट करने के इंडियनमुजाहिदीन के नेटवर्क के मंसूबों को भी नेस्तोनाबूद किया था। अमित शाह के नेतृत्‍व में 2005 में गुजरात पुलिस ने आपराधिक छवि वालेसोहराबुद्दीन शेख का एन्काउंटर किया था। इस केस में कुछ महीने पहले आईपीएस ऑफिसर अभय चूडास्मा गिरफ्तार हुए थे, जिनके बयानके बाद सीबीआई ने बताया कि राज्‍य सरकार जिसे एक मुठभेड़ बता रही है, सोहराबुद्दीन शेख की हत्‍या उसी राज्‍य पुलिस द्वारा की गई है।बाद में इसक केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई का आरोप था कि शाह के इशारे पर ही फर्जी मुठभेड़ का नाटक रचा गया।धूमकेतु की तरह उठे उनके राजनीतिक कैरियर पर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले के साथ ही ग्रहण लग गया। सोहराबुद्दीन शेख की पत्‍नीतथा इस केस के प्रमुख गवाह तुलसी प्रजापति की भी हत्‍या कर दी गई थी। इस केस की जांच कर रही राज्‍य पुलिस की एक शाखा सीआईडीकी टीम, अमित शाह को अपनी रोज़ की रिपोर्ट सौंपती थी। उन्‍हीं टीम के सदस्‍य चूडास्मा और वंजारा को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लियाथा। सीआईडी द्वारा इस केस की सही जांच नहीं करने तथा कोई पुख्ता सबूत इकट्ठा नहीं करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की जांचसीबीआई को सौंपी थी

9 Replies to “अमित शाह AMIT SHAH”

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