By | 5th July 2019

अपनी आँखों को सजाते

अगर इशारों में ही बातें करनी थी , तो पहले बताते ।

हम अपनी शायरी को नही, अपनी आँखों को सजाते !!!

अपनी आँखों को सजाते

जब भी मैं टूटता हूँ

जब भी मैं टूटता हूँ, तुम्हे ही ढूंढता हूँ ।

कभी तुमने ही एक बार कहा थी ना , हम एक है !!!

जब भी मैं टूटता हूँ

तुमको पाकर जमाने से

तुमको पाकर जमाने से खोना कौन चाहेगा ।

इस शहर में तन्हां होना कौन चाहेगा ।।।

तुमको पाकर जमाने से

मुझे ज़िन्दा देख कर बोली

वो मुझे ज़िन्दा देख कर बोली …

“मन” बद्दुआ नही लगती क्या तुमको ..

मुझे ज़िन्दा देख कर बोली

आखिरी कॉल किसने काटी

बेवफा मैं हूँ ? ठीक है, लेकिन ये बताओ !

आखिरी कॉल किसने काटी थी ??

आखिरी कॉल किसने काटी

तुम अपनी ये अदाएं

“सुनो मन”
तुम अपनी ये अदाएं, ये मुस्कुराहटें और ये मस्त निगाहें ,
नक़ाब ओढ़ लो , कहीं हम उजड़ ना जाए …

तुम अपनी ये अदाएं

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