By | March 22, 2019
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छोड़कर उसने मुझे

वो साथ रहती तो शायद बदल भी जाता मैं , छोड़कर उसने मुझे और आवारा कर दिया …

छोड़कर उसने मुझे

कैसा नसीब पाया है मैंने प्यार का

न जाने कैसा नसीब पाया है मैंने प्यार का , उसका दिल ही नहीं करता मुझसे बात करने का , और मेरा दिल करता सिर्फ उसी से बात करने का।।।

 कैसा नसीब पाया है मैंने प्यार का

मैं तो तेरा रोज़ का

ये दर्द कुछ तो डिस्काउंट कर दे मेरे लिए , मैं तो तेरा रोज़ का ग्राहक हूँ।।।

मैं तो तेरा रोज़ का

एक बार समझाया होता

मोहब्बत नही थी तो एक बार समझाया तो होता । बेचारा दिल ​तुम्हारी खामोशी ​को इश्क़ समझ बैठा ।

 एक बार समझाया होता

मोहब्बत के शहर मे

बहुत भीड़ है इस मोहब्बत के शहर मे , एक बार जो बिछड़ जाए दोबारा नही मिलता।

मोहब्बत के शहर मे

एक खूबसूरत सा रिश्ता

एक खूबसूरत सा रिश्ता यूँ खतम हो गया.. हम दोस्ती निभाते रहे….. और वो इसे इश्क समझ बैठे..

एक खूबसूरत सा रिश्ता

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