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कुतुबुद्दीन ऐबक

पूरा नाम     कुतुबुद्दीन ऐबक जन्म भूमि    तुर्किस्तान मृत्यु तिथि    1210 ई. मृत्यु स्थान   लाहौर शासन काल   1206 ई. से 1210 ई. तक राज्याभिषेक   जून, 1206 ई., लाहौर धार्मिक मान्यता      इस्लाम कुतबुद्दीन ऐबक मध्यकालीन भारत के शासक थे, और साथ ही दिल्ली सल्तनत…Read More »

Kasturba कस्तूरबा

Kasturba कस्तूरबा पोरबंदर के गोकुलदास और व्रजकुवर कपाडिया की पुत्री के रूप में का कस्तूरबा का जन्म हुआ। 1883 में 14 साल की कस्तूरबा का विवाह, सामाजिक परम्पराओ के अनुसार 13 साल के मोहनदास करमचंद गांधी के करवा दिया गया। उनके शादी…Read More »

Changez khan चंगेज़ खान

प्रारंभिक जीवन :      Changez khan चंगेज़ खान का जन्म ११६२ के आसपास आधुनिक मंगोलिया के उत्तरी भाग में ओनोन नदी के निकट हुआ था। चंगेज़ खान की दांयी हथेली पर पैदाइशी खूनी धब्बा था।उसके तीन सगे भाई व एक सगी बहन थी और…Read More »

Florence Nightingale

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिग आन्दोलन का जन्मदाता माना जाता है। दया व सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल “द लेडी विद द लैंप” (दीपक वाली महिला) के नाम से प्रसिद्ध हैं। इनका जन्म एक समृद्ध और उच्चवर्गीय ब्रिटिश परिवार में हुआ था।…Read More »

बेगम हज़रत महल

NAAM ; बेगम हज़रत महल जन्म  1820 धर्म   शिया इस्लाम जन्मस्थान    फैजाबाद, अवध, भारत राष्ट्रीयता     भारतीय बच्चे   एक बेटा योगदान से मिली पहचान     महक परी लखनऊ में 1857 की क्रांति का नेतृत्व बेगम हज़रत महल ने किया था। अपने नाबालिग पुत्र बिरजिस कादर को गद्दी पर बिठाकर उन्होंनेअंग्रेज़ी सेना का स्वयं मुक़ाबला किया। उनमें संगठन की अभूतपूर्व क्षमता थी और इसी कारण अवध के ज़मींदार, किसान और सैनिक उनके नेतृत्व मेंआगे बढ़ते रहे। आलमबाग़ की लड़ाई के दौरान अपने जांबाज सिपाहियों की उन्होंने भरपूर हौसला आफज़ाई की और हाथी पर सवार होकर अपने सैनिकों केसाथ दिन-रात युद्ध करती रहीं। लखनऊ में पराजय के बाद वह अवध के देहातों में चली गईं और वहाँ भी क्रांति की चिंगारी सुलगाई। बेगम हज़रत महलऔर रानी लक्ष्मीबाई के सैनिक दल में तमाम महिलायें शामिल थीं। लखनऊ में बेगम हज़रत महल की महिला सैनिक दल का नेतृत्व रहीमी के हाथों में था, जिसने फ़ौजी भेष अपनाकर तमाम महिलाओं को तोपऔर बन्दूक चलाना सिखाया। रहीमी की अगुवाई में इन महिलाओं ने अंग्रेज़ों से जमकर लोहा लिया। लखनऊ की तवायफ हैदरीबाई के यहाँ तमाम अंग्रेज़ अफ़सर आते थे और कई बार क्रांतिकारियों के ख़िलाफ़ योजनाओं पर बात किया करते थे।हैदरीबाई ने पेशे से परे अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुये इन महत्त्वपूर्ण सूचनाओं को क्रांतिकारियों तक पहुँचाया और बाद में वह भी रहीमी केसैनिक दल में शामिल हो गयी। अंग्रेज सैनिक लगातार रेजीडेंसी से अपने साथियों को मुक्त कराने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन भारी विरोध के कारण अंग्रेजो को लखनऊ सेनाभेजना कठिन हो गया था. इधर रेजीडेंसी पर विद्रोहियों द्वारा बराबर हमले किये जा रहे थे. बेगम हजरत महल लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रो में घूम – घूमकर लोगो का उत्साह बढ़ा रही थी. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है. दिल्ली पर अंग्रेजो का अधिकार स्थापित हो चुका था. मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ़र के बंदी होते हीक्रांतकारी विद्रोहियों के हौसले कमजोर पड़ने लगे. लखनऊ भी धीरे – धीरे अंग्रेजो के नियंत्रण में आने लगा था. हैवलाक और आउट्रूम की सेनाएं लखनऊपहुँच गयी. बेगम हजरत महल ने कैसरबाग के दरवाजे पर ताले लटकवा दिए. अंग्रेजी सेनाओ ने बेलीगारद पर अधिकार कर लिया. बेगम ने अपनेसिपाहियों में जोश भरते हुए कहा ,” अब सब कुछ बलिदान करने का समय आ गया है अंग्रेजो की सेना का अफसर हैवलाक आलमबाग तक पहुँच चूका था. कैम्पवेल भी कुछ और सेनाओ के साथ उससे जा मिला. आलमबाग मेंबहुत भीड़ इकट्ठी थी. जनता के साथ महल के सैनिक, नगर की सुरक्षा के लिए उमड़ पड़े थे. घनघोर बारिश हो रही थी. दोनों ओर से तोपों की भीषण मारचल रही थी. बेगम हजरत महल को चैन नहीं था. वे चारो ओर घूम – घूम कर सरदारों में जोश भर रही थी. उनकी प्रेरणा ने क्रांतकारी विद्रोहियों में अद्भुत उत्साह का संचार किया. वे भूख प्यास सबकुछभूलकर अपनी एक – एक इंच भूमि के लिए मर – मिटने को तैयार थे. 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सन 1857-58 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, राजा जयलाल सिंह के नेतृत्व में बेगम हज़रात महल के समर्थकों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडियाकंपनी के सेना के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और लखनऊ पर कब्ज़ा कर लिया। लखनऊ पर कब्ज़े के बाद हज़रात महल अपने नाबालिग पुत्र बिरजिसकादर को अवध की गद्दी पर बिठा दिया। इसके पश्चात जब कंपनी की सेना ने लखनऊ और अवध के ज्यादातर भाग पर फिर से कब्ज़ा जमा लिया तबबेगम हज़रत महल को पीछे हटना पड़ा। इसके पश्चात उन्होंने नाना साहेब (पेशवा, जिन्होंने कानपुर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व  किया) के साथ मिलकर काम किया औरफिर फैजाबाद के मौलवी के साथ मिलकर शाहजहाँपुर आक्रमण को अंजाम दिया। उन्होंने अंग्रेजों पर हिन्दुओं और मुसलमानों के धर्म में दखलंदाजीकरने का आरोप लगाया। स्मारक बेगम हज़रत महल का मकबरा काठमांडू के मध्य जामा मस्जिद के पास (घंटाघर पर) स्थित है। यह स्थान दरबार मार्ग से ज्यादा दूर नहीं है।इसकी देख-भाल जामा मस्जिद केन्द्रीय समिति करती है। 15 अगस्त 1962 को बेगम हज़रत महल के सम्मान में लखनऊ स्थित हजरतगंज के ‘ओल्ड विक्टोरिया पार्क’ का नाम बदलकर ‘बेगम हज़रतमहल पार्क’ कर दिया गया। नाम बदलने के साथ-साथ यहाँ एक संगमरमर का स्मारक भी बनाया गया। बेगम हज़रत महल पार्क में रामलीला, दशहराऔर लखनऊ महोत्सव जैसे समारोहों का आयोजन होता है। 10 मई 1984 को भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। A.      लखनऊ में ‘1857 की क्रांति’ का नेतृत्व बेगम हज़रत महल ने किया था। अपने नाबालिग पुत्र बिरजिस कादर को गद्दी पर बिठाकर उन्होंने अंग्रेज़ीसेना का स्वयं मुक़ाबला किया।   B.      7 जुलाई 1857 से अवध का शासन हजरत महल के हाथ में आया।  …Read More »

कमला नेहरु Kamala Neharu

कमला नेहरु Kamala Neharu जवाहरलाल नेहरु की पत्नी और इंदिरा गांधी की माँ कमला नेहरु  का जन्म 1 अगस्त 1899 को दिल्ली में एक कश्मीरी परिवार में हुआ था | उनके पिता जवाहरलाल कौल एक साधारण व्यवसायी थे | उन दिनों लडकियों…Read More »

Tipu Sultan टीपू सुल्तान

Tipu Sultan टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवम्बर 1750 में वर्तमान बेंगलुरु के देवानाहली स्थान पर हुआ | उनका नाम Tipu Sultan टीपू सुल्तान आरकोट के औलिया टीपू मस्तान के नाम पर रखा गया | Tipu Sultan टीपू को उनके दादाजी फ़तेह…Read More »

Muhammad bin Tughluq

Muhammad bin Tughluq दिल्ली के तुगलक वंश की नींव डालने वाले गयासुद्दीन तुगलक के पुत्र और उत्तराधिकारी मुहम्मद बिन तुगलक (Muhammad bin Tughluq) ने 1325 से 1351 ईस्वी तक शासन किया | इस जटिल व्यक्तित्व के शासक को इतिहास में सनक भरी…Read More »

Dropdi द्रौपदी

Dropdi द्रौपदी महाभारत के सबसे प्रसिद्ध पात्रों में से एक है। इस महाकाव्य के अनुसार द्रौपदी पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री है जो बाद में पांचों पाण्डवों की पत्नी बनी। द्रौपदी पंच-कन्याओं में से एक हैं जिन्हें चिर-कुमारी कहा जाता…Read More »

NANA SHAHEB नाना साहेब

NANA SHAHEB नाना साहेब शिवाजी के शासनकाल के बाद के सबसे प्रभावशाली शासकों में से एक थे। उन्हें बालाजी बाजीराव के नाम से भी संबोधित किया गया था। 1749 में जब छत्रपति शाहू की मृत्यु हो गई, तब उन्होंने पेशवाओं को मराठा…Read More »