By | March 19, 2019
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पूरा नाम     कुतुबुद्दीन ऐबक

जन्म भूमि    तुर्किस्तान

मृत्यु तिथि    1210 ई.

मृत्यु स्थान   लाहौर

शासन काल   1206 ई. से 1210 ई. तक

राज्याभिषेक   जून, 1206 ई., लाहौर

धार्मिक मान्यता      इस्लाम

कुतबुद्दीन ऐबक मध्यकालीन भारत के शासक थे, और साथ ही दिल्ली सल्तनत के पहले शासक भी थे और गुलाम वंश के पहले सल्तनत थे। ऐबक समुदाय के वे तुर्किश थे और सिर्फ 1206 से 1210 के बीच चार साल के लिये सुल्तान थे।

क़ाज़ी ने कुतबुद्दीन की देखभाल काफी अच्छी तरह से की थी। और बचपन में ही कुतबुद्दीन को तीरंदाजी, तलवारबाजी, शिक्षा और घोड़े चलाने का प्रशिक्षण दे रखा था। लेकिन जब उनके मास्टर की मृत्यु हो गयी तब उनके बेटे ने कुतबुद्दीन को एक व्यापारी को बेच दिया था।

और अंततः उन्हें मध्य अफगानिस्तान में घोर के शासक सुल्तान मुहम्मद घोरी ने ख़रीदा था। कुतबुद्दीन ऐबक ने जल्द ही अपने हुनर से मुहम्मद घोर को आकर्षित कर दिया था और वे जल्द ही मुहम्मद घोर के चहेते भी बन चुके थे। उत्तरी भारत के बहुत से राज्य को बाद में कुतबुद्दीन ने ही हथिया लिया था। और जैसे-जैसे घोरी के सुल्तान का साम्राज्य बढ़ता गया वैसे-वैसे उन्होंने कुतबुद्दीन को मध्य भारत में शासन करने का अधिकार दे दिया था।

अफगानिस्तान में अपने साम्राज्य का विस्तार कर मुहम्मद घोरी ने खुद को एक मजबूत और शक्तिशाली शासक साबित किया था। उनका ज्यादातर साम्राज्य अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत में फैला हुआ था। और इसीके चलते कुतबुद्दीन ऐबक को भी 1206 में दिल्ली के सुल्तान की पदवी दी गयी थी, उस समय मुहम्मद घोरी की युद्धभूमि पर ही मृत्यु हो गयी थी। उन्होंने घोरी साम्राज्य में प्रशासनिक यंत्रणा को सुधारने के काफी प्रयास किये थे।

*शासनक्षेत्र

तराइन के युद्ध के बाद मुइज्जुद्दीन ग़ज़नी लौट गया और भारत के विजित क्षेत्रों का शासन अपने विश्वनीय ग़ुलाम क़ुतुबुद्दीनऐबक के हाथों में छोड़ दिया। पृथ्वीराज के पुत्र को रणथम्भौर सौंप दिया गया जो तेरहवीं शताब्दी में शक्तिशाली चौहानों की राजधानी बना। अगलेदोवर्षोंमेंऐबकने,ऊपरीदोआबमेंमेरठ, बरनतथाकोइल (आधुनिकअलीगढ़) परक़ब्ज़ाकिया।इसक्षेत्रकेशक्तिशालीडोर-राजपूतोंनेऐबककामुक़ाबलाकिया,लेकिनआश्चर्यकीबातहैकिगहदवालोंकोतुर्कीआक्रमणसेसबसेअधिकनुक़सानकाख़तराथाऔरउन्होंनेनतोडोर-राजपूतोंकीकोईसहायताकीऔरनहीतुर्कोंकोइसक्षेत्रसेबाहरनिकालनेकाकोईप्रयासहीकिया।मुइज्जुद्दीन 1194 ई. मेंभारतवापसआया।वहपचासहज़ारघुड़सवारोंकेसाथयमुनाकोपारकरकन्नौजकीओरबढ़ा।इटावाज़िलेमेंकन्नौजकेनिकटछंदवाड़मेंमुइज्जुद्दीनऔरजयचन्द्रकेबीचभीषणलड़ाईहुई।बतायाजाताहैकिजयचन्द्रजीतहीगयाथाजबउसेएकतीरलगाऔरउसकीमृत्युहोगई।उसकेमरनेकेसाथहीसेनाकेभीपाँवउखड़गए।अबमुइज्जुद्दीनबनारसकीओरबढ़ाऔरउसशहरकोतहस-नहसकरदिया।उसनेवहाँकेमन्दिरोंकोभीनहींछोड़ा।यद्यपिइसक्षेत्रकेएकभागपरतबभीगहदवालोंकाशासनरहाऔरकन्नौजजैसेकईगढ़, तुर्कोंकाविरोधकरतेरहेतथापिबंगालकीसीमातकएकबड़ाभूभागउनकेक़ब्ज़ेमेंआगया।

छोटेसेकार्यकालमेंबड़ाजिहाद

ऐसाबोलाजाताहैकिकुतुबुद्दीननेअपनेछोटेसेकार्यकालमेंबड़ाजिहादकरदियाथाअगरयहऔरसालोंतकसत्तापररहतातोभारतपूरीतरहसेमुस्लिमोंकादेशबनचुकाहोता.

कुछजगहपरतोयहभीसबूतदिएगयेहैंकुतुबमीनारकुतुबुद्दीननेनहींबनवाईहैयहाँके 27 मंदिरोंकोतोड़दियागयाताकिकोईभीइसजगहकोपहचानसकेबादमेंखूबसूरतकलकोअपनाबनालियालेकिनआजतककहींनहींलिखाहैकिकुतुबुद्दीनइसकाप्रयोगकिसलिएकरताथा?

इस्लामकेअन्दरकहींभीकिसीभीतरहकीमूर्तिनहींबनाईजासकतीहैजबकियेलोगनातोचित्रकारीकरसकतेहैंऔरनाहीफोटोग्राफीकरसकतेहैंतोकुतुबमीनारमेंचित्रकलाकिसमुस्लिमराजानेबनवाईथीं.

तोअबआगेकाअध्ययनआपकोखुदशुरूकरदेनाचाहिएताकिआपकुतुबुद्दीनऐबककेअसलीइतिहाससेवाकिफहोजाएँभारतकोइस्लामदेशबनानेआयायहगुलामदेशमेंकत्लेआमकरकेगयाऔरहजारोंमंदिरोंकोतोड़गयालेकिनहमआजभीइसेमहानराजाबोलतेहैं.

*तुर्कसाम्राज्यकासंस्थापक

कुतुबुद्दीनऐबकभारतमेंतुर्कसल्तनतकासंस्थापकमानाजाताहै।उसनेभारतमेंइस्लामिकसाम्प्रदायिकराज्यकीस्थापनाकी।वास्तवमेंइसीइस्लामिकसाम्प्रदायिकराज्यकीस्थापनार्थहीपिछलेपांचसौवर्षोंसेविभिन्नमुस्लिमआक्रांताभारतपरआक्रमणकरतेरहेथेजिनकासफलतापूर्वकप्रतिकारभारतकेस्वतंत्रताप्रेमीराजाओंऔरउनकीप्रजाकेद्वाराकियाजारहाथा।इसप्रतिकारकेविषयमेंरामधारीसिंहदिनकरअपनीपुस्तक ‘संस्कृतिकेचारअध्याय’ केपृष्ठ 237 परलिखतेहैं-‘‘इस्लामकेवलनयामतनहीथा।यहहिन्दुत्वकाठीकविरोधीमतथा।

*जयचंदसेयुद्घकीतैयारी

कुतुबुद्दीनऐबक नेजबभारतमेंप्रवेशकियातोउसनेभीइसीपरंपराकानिर्वाहकियाऔरभारतीयधर्मकासर्वनाशकरइस्लामकापरचमफहरानाअपनाउद्देश्यघोषितकिया।अपनेइसउद्देश्यकीप्राप्तिमेंउसेजयचंदबाधादिखाईदिया, तोउसकेनाशकेलिएउसनेगोरीकेआदेशानुसारयोजनाबनानीआरंभकी।गोरीनेउसकीयोजनासेसहमतहोकरएकसेनाजयचंदकेनाशकेलिएभेजी।कन्नौजकाशासकजयचंदउससमयकन्नौजसेलेकरवाराणसीतकशासनकररहाथा।वाराणसीकीपवित्रभूमिकेरजकणोंकीदेशऔरधर्मकेप्रतिपूर्णत: निष्ठावानधूलिभीउसपापीजयचंदकाहृदयपरिवर्तननहीकरपायीथी, औरवहदेशधर्मकेप्रतिकृतघ्नताकरगयाथा।मांभारतीकाश्रापउसेलगाऔरउसेअपनेकियेगयेपापकर्मकादण्डदेनेकेलिएक्रूरकालनेअपनेपंजोंमेंकसनाआरंभकरदिया।कुतुबुद्दीनऐबकअपनीसैन्यटुकड़ीकेसाथभारतकेकईनगरोंऔरबहुतसेगांवोंकोलूटताऔरमारकाटकरताहुआतेजीसेकन्नौजकीओरबढ़ताआरहाथा।

*ऐबककेसैन्यअभियान

उसनेगोरीकेसहायककेरूपमेंकईक्षेत्रोंपरसैन्यअभियानमेंहिस्सालियाथातथाइनअभियानोंमेंउसकीमुख्यभूमिकारहीथी।इसीसेखुशहोकरगोरीउसेइनक्षेत्रोंकासूबेदारनियुक्तकरगयाथा।महमूदगोरीविजयकेबादराजपूतानामेंराजपूतराजकुमारोंकेहाथसत्तासौंपगयाथापरराजपूततुर्कोंकेप्रभावकोनष्टकरनाचाहतेथे।सर्वप्रथम११९२मेंउसनेअजमेरतथामेरठमेंविद्रोहोंकादमनकियातथादिल्लीकीसत्तापरआरूढ़हुआ।दिल्लीकेपासइन्द्रप्रस्थकोअपनाकेन्द्रबनाकरउसनेभारतकेविजयकीनीतिअपनायी।भारतपरइससेपहलेकिसीभीमुस्लिमशासककाप्रभुत्वतथाशासनइतनेसमयतकनहींटिकाथा।

        जाटसरदारोंनेहाँसीकेकिलेकोघेरकरतुर्ककिलेदारमलिकनसीरुद्दीनकेलिएसंकटउत्पन्नकरदियाथापरऐबकनेजाटोंकोपराजितकरहाँसीकेदुर्गपरपुनःअधिकारकरलिया।सन्११९४मेंअजमेरकेउसनेदूसरेविद्रोहकोदबायाऔरकन्नौजकेशासकजयचन्दकेसातथचन्दवारकेयुद्धमेंअपनेस्वामीकासाथदिया।११९५इस्वीमेंउसनेकोइल (अलीगढ़कोजीतलिया।सन्११९६मेंअजमेरकेमेदोंनेतृतीयविद्रोहकाआयोजनकियाजिसमेंगुजरातकेशासकभीमदेवकाहाथथा।मेदोंनेकुतुबुद्दीनकेप्राणसंकटमेंडालदियेपरउसीसमयमहमूदगौरीकेआगमनकीसूचनाआनेसेमेदोंनेघेराउठालियाऔरऐबकबचगया।इसकेबाद११९७मेंउसनेभीमदेवकीराजधानीअन्हिलवाड़ाकोलूटाऔरअकूतधनलेकरवापसलौटा।

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