By | March 23, 2019
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हजारों के भीड़ में

वो कहती हैं , नकाब में भी पहचान लेते हो हजारों के भीड़ में ,

मैंने मुस्कुरा कर बोला, तुमसे इश्क भी हुआ था हजारों के भीड़ मे…

हजारों के भीड़ में

हर शक्स आवारा नहीं होता

हालात कर देते हैं भटकने के लिए मजबूर ये दोस्त ,

घर से निकला हुआ हर शक्स आवारा नहीं होता ।

हर शक्स आवारा नहीं होता

मैं भी कितना पागल हूँ

मैं भी कितना पागल हूँ, हरदम रब से उसकी खुशियों की दुआ करता था ,,

भला क्या पता कि उसे मुझसे दूर रहने में ही खुशियाँ मिलती हैं …

मैं भी कितना पागल हूँ

तुम और तेरी मुस्कान

कुदरत ने मुझे बेशुमार धन-दौलत दिया हैं —–

तुम और तेरी मुस्कानों का ।।।

तुम और तेरी मुस्कानों

तेरी एक झलक पाने को

तेरी एक झलक पाने को तरस जाता है ये दिल ,

खुशनसीब हैं वो लोग जो तेरे घर के सामने रहते है ।।।

तेरी एक झलक पाने को

एक “प्यारा फूल” जो हैं

वह और उसकी दोस्त सभी आपस में बातें कर रहे थे ,

कि ना जाने फूलों सी महक कहाँ से आ रही हैं ?

मैं उसके पास से गुजरते हुए बोला ,

तुम लोगों के साथ एक “प्यारा फूल” जो हैं।

एक “प्यारा फूल” जो हैं

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