By | March 14, 2019
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इतनी मोहब्बत कोई कैसे कर सकता

इतनी मोहब्बत बिखेर दूँगा अपने लफ़्ज़ों से ,

की एक ना एक दिन तू भी कहेगी ,,

की इतनी मोहब्बत कोई कैसे कर सकता है …

इतनी मोहब्बत कोई कैसे कर सकता

भूल जाओ मुझे

तुम्हारे बस में अगर हो तो भूल जाओ मुझे ,

तुम्हें भुलाने में शायद मुझे ज़माना लगेगा !!

 भूल जाओ मुझे

कब तक अधूरापन लिए भटकता फिरूँगा

सज़ा दें , सिला दें , बना दें या मिटा दें …

मगर वो कोई तो फ़ैसला सुना दें !!

आखिर कब तक अधूरापन लिए भटकता फिरूँगा …

कब तक अधूरापन लिए भटकता फिरूँगा

कैसी है अब जिंदगी

किसी ने मुझसे पूछा “कैसी है अब जिंदगी”….!

मैने मुस्कुरा कर जवाब दिया “वो बहुत खुश है” …

कैसी है अब जिंदगी

ऐसे ही मेरे पास रहो

पूरी “ज़िंदगी” गुज़ार दूँ मैं यूँ ही “बैठे बैठे”…!

बस “तुम” ऐसे ही मेरे पास रहो “तस्वीर” बनकर….

ऐसे ही मेरे पास रहो

बहुत कुछ नहीं था मेरे पास

तुझ पर खर्च करने के लिए बहुत कुछ नहीं था मेरे पास…

थोडा वक्त था, थोडा मैं… दोनों बरबाद हो गये …”

बहुत कुछ नहीं था मेरे पास

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