By | November 12, 2017
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Freedom for Country


सड़ती रही लाशें सड़को पर
गांधी फिर भी मौन थे।
हमें पढ़ाया गांधी ने आजादी दिलायी,
तो फांसी चढ़ने वाले
वो 25-25 साल के नौजवान कौन थे ?

वो रस्सी तो आज भी  संग्रहालय में है
जिससे गांधीजी अपनी बकरी बांधा करते थे।
किन्तु वो रस्सी कहां है
जिस पे भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु हंसते हुए झूल गए थे?

हालात-ए-मुल्क देख के रोया न गया…

कोशिश तो की, पर मुंह ढक के सोया न गया.

जाने कितने झूले थे फाँसी पर, कितनो ने गोली खाई थी….

क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी….

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