By | March 19, 2019
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नाम   – अबुल-फतह जलाल उद्दीन मुहम्मद अकबर
जन्म   – 15 अक्तुबर, 1542 अमरकोट
पिता   –  हुमांयू
माता   –   नवाब हमीदा बानो बेगम साहिबा
विवाह  –  रुकैया बेगम सहिबा, सलीमा सुल्तान बेगम सहिबा, मारियाम उज़-ज़मानि बेगम सहिबा, जोधाबाई राजपूत।

        अकबर हुमायु के बेटे थे, जिन्होंने पहले से ही मुघल साम्राज्य का भारत में विस्तार कर रखा था। 1539-40 में चौसा और कन्नौज में होने वाले शेर शाह सूरी से युद्ध में पराजित होने के बाद मुघल सम्राट हुमायु पश्चिम की और गये जहा सिंध में उनकी मुलाकात 14 साल की हमीदा बानू बेगम जो शैख़ अली. अकबर की बेटी थी, उन्होंने उनसे शादी कर ली और अगले साल ही जलाल उद्दीन मुहम्मद का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को राजपूत घराने में सिंध के उमरकोट में हुआ (जो अभी पकिस्तान में है) जहा उनके माता-पिता को वहा के स्थानिक हिंदु राना प्रसाद ने आश्रय दिया। और मुघल शासक हुमायु के लम्बे समय के वनवास के बाद, अकबर अपने पुरे परिवार के साथ काबुल स्थापित हुए। जहा उनके चाचा कामरान मिर्ज़ा और अस्करी मिर्ज़ा रहते थे। उन्होंने अपनी पुरानी जवानी शिकार करने में, युद्ध कला सिखने में, लड़ने में, भागने में व्यतीत की जिसने उसे एक शक्तिशाली, निडर और बहादुर योद्धा बनाया। लेकिन अपने पुरे जीवन में उन्होंने कभी लिखना या पढना नहीं सिखा था। ऐसा कहा जाता है की जब भी उन्हें कुछ पढने की जरुरत होती तो वे अपने साथ किसी को रखते थे जिसे पढना लिखना आता हो। 1551 के नवम्बर में अकबर ने काबुल की रुकैया से शादी कर ली। महारानी रुकैया उनके ही चाचा हिंदल मिर्ज़ा की बेटी थी। 

        अकबर के शासन के अंत तक १६०५ में मुगल साम्राज्य में उत्तरी और मध्य भारत के अधिकाश भाग सम्मिलित थे और उस समय के सर्वाधिक शक्तिशाली साम्राज्यों में से एक था। बादशाहों में अकबर ही एक ऐसा बादशाह था, जिसे हिन्दू मुस्लिम दोनों वर्गों का बराबर प्यार और सम्मान मिला। उसने हिन्दू-मुस्लिम संप्रदायों के बीच की दूरियां कम करने के लिए दीन-ए-इलाही नामक धर्म की स्थापना की। उसका दरबार सबके लिए हर समय खुला रहता था। उसके दरबार में मुस्लिम सरदारों की अपेक्षा हिन्दू सरदार अधिक थे। अकबर ने हिन्दुओं पर लगने वाला जज़िया ही नहीं समाप्त किया, बल्कि ऐसे अनेक कार्य किए जिनके कारण हिन्दू और मुस्लिम दोनों उसके प्रशंसक बने। अकबर मात्र तेरह वर्ष की आयु में अपने पिता नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायुं की मृत्यु उपरांत दिल्ली की राजगद्दी पर बैठा था। अपने शासन काल में उसने शक्तिशाली पश्तून वंशज शेरशाह सूरी के आक्रमण बिल्कुल बंद करवा दिये थे, साथ ही पानीपत के द्वितीय युद्ध में नवघोषित हिन्दू राजा हेमू को पराजित किया था।अपने साम्राज्य के गठन करने और उत्तरी और मध्य भारत के सभी क्षेत्रों को एकछत्र अधिकार में लाने में अकबर को दो दशक लग गये थे। उसका प्रभाव लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर था और इस क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर सम्राट के रूप में उसने शासन किया। सम्राट के रूप में अकबर ने शक्तिशाली और बहुल हिन्दू राजपूत राजाओं से राजनयिक संबंध बनाये और उनके यहाँ विवाह भी किये।

        अकबर ने भारत को अपने आधीन करने के लिये कुछ रणनीति बनाई जिसमे युद्ध और समझौता शामिल था | अकबर के पास विशाल सैन्यबल था जिससे वो आसानी से विरासतों पर अपना परचम फहरा सकता था लेकिन इन सबमे बहुत सारा खून बहता था जो कि कई मायनों में अकबर को पसंद नहीं था इसलिये उसने समझौते की नीति को भी अपनाया जिसके तहत वो अन्य राजा की बेटियों से विवाह कर सम्मान के साथ उनसे रिश्ते बनाकर उन रियासतों को बिना जन हानि के अपने आधीन कर लेता था | उन दिनों अकबर के सबसे बड़े शत्रु राजपूत थे जिन्हें वो इन दोनों नीतियों में से किसी एक तरह से अपने आधीन करता था |जब अकबर का युद्ध राजा भारमल से हुआ तब उसने उनके तीनों बेटों को बंदी बना लिया तब राजा भारमल ने अकबर के सामने समझौते के लिये हाथ बढ़ाया और इस तरह राजा भारमल की कन्या राजकुमारी जोधा का विवाह अकबर के साथ किया गया | जोधा ही मुग़ल साम्राज्य की मरियम उज़-ज़मानी (जिसकी संतान राजा बनती हैं )बनी | जोधा की पहले दो संताने (हसन हुसैन )हुई जो कुछ ही महीने बाद मृत्यु को प्राप्त हो गई | बाद में जोधा की संतान जहाँगीर ने मुगुल साम्राज्य पर अपनी हुकूमत की | इसी तरह मुग़ल और राजपुताना के संबंधो के कारण हम हिन्दू और मुग़ल नक्काशी का समावेश देख पाते हैं | 

साम्राज्य विस्तार:

        अकबर अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था इसके लिए उसने सीधी संघर्ष करने वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करने , अधीनता स्वीकार करने ,वालो को शासन में पद देने तथा मित्रता करने की नीति अपनयायी. अकबर राजपूतो के साथ मित्रता का महत्त्व समझता था इसलिए उसने राजपूत परिवारों के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर स्थिति को मजबूत किया और इसके लिए उसने जोधा (Jodha bai )से विवाह भी किया .और जोधबाई और अकबर के पुत्र जहाँगीर ही अकबर Akbar के बाद मुग़ल बादशाह Mugal Badshah बना | इसतरह जोधा अकबर (Jodhaa Akbar History ) की प्रेम कहानी इतिहास में अमर प्रेम कहानी बन गयी. अकबर ने आमेर , जोधपुर , बीकानेर ,जैसलमेर , के राजपूतो को दरवार में सम्मान जनक स्थान दिया . राजपूत राजा भगवान् दास तथा उनके पोते मानसिंह को दरवार में सबसे ऊँचा स्थान दिया | उसने हिंदुयो का जजिया कर की समाप्त कर हिंदुयो को खुश किया | जिससे हिन्दू अकबर पर विस्वास करने लगे. कई राजपूतो ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली परंतु मेवाड़ के माहाराणा प्रताप ने सर झुकाने से इनकार कर दिया , तो अकबर Akbar की सेना और  माहाराणा प्रताप Maharana Pratap का सामना सं 1576 में हल्दीघाटी Haldighati के मैदान में हुआ जो भारतीय  इतिहास में हल्दीघाटी के युद्ध ( Haldighati War ) के नाम से पसंद है | माहाराणा प्रताप  भीषण युद्ध करते हुए बुरी तरह घायल हुए , और उन्हें परिवार सहित जंगल जाना पढ़ा उन्होंने प्राण किया जब तक वह मेवाड़ को वापस नहीं ले लेंगे , वह घास की रोटी खाएंगे | जमीन पर सोएंगे और सभी सुखो का त्याग कर देंगे.

        हुमायु के निर्वासन के दौरान अकबर को काबुल लाया गया और उसके चाचाओ ने उसकी परवरिश की | उन्होंने अपना बचपन शिकार और युद्ध कला में बिताया लेकिन पढना लिखना कभी नही सिखा | 1551 में अकबर Akbar ने अपने चाचा हिंडल मिर्जा की इकलौती बेटी रुकैया सुल्तान बेगम से निकाह कर लिया | इसके कुछ समय बाद ही हिंडल मिर्जा की युद्ध के दौरान मौत हो गयी|हुमायु ने 1555 में शेरशाह सुरी के बेटे इस्लाम शाह को पराजित कर दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया | इसके कुछ समय बाद ही हुमायु की मृत्यु हो गयी | Akbar अकबर के अभिभावक बैरम खान ने  13 वर्ष की उम्र में ही 14 फरवरी 1556 में अकबर को दिल्ली की राजगद्दी पर बिठा दिया | बैरम खान ने उसके वयस्क होने तक राजपाट सम्भाला और अकबर को शहंशाह का ख़िताब दिया  | सुरी साम्राज्य ने छोटे बालक का भय ना करते हुए हुमायु की मौत के बाद फिर से आगरा और दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया था|बैरम खान के नेतृत्व में उन्होंने सिकन्दर शाह सुरी के खिलाफ मोर्चा निकाला |उस समय सिंकंद्र शाह सुरी का सेनापति हेमू था और बैरम खान के नेतृत्व में Akbar अकबर की सेना ने हेमू को 1556 में पानीपत के दुसरे युद्ध में पराजित कर दिया | इसके तुरंत बाद मुगल सेना ने आगरा और दिल्ली पर अपना आधिपत्य कर दिया | Akbar अकबर ने दिल्ली पर विजयी प्रवेश किया और एक महीने तक वहा पर निवास किया |उसके बाद अकबर और बैरम खान दोनों पंजाब लौट गये जहा पर सिकंदर शाह फिर से सक्रिय हो गया था |

जोधाबाइ के साथ विवाह:

        जोधाबाइ और अकबर के विवाह के बाद जोधाबाइ कभी अपने माइके नहीं गयी। उन्हे राजपूतना खानदान ने सदा के लिए त्याग दिया था। अकबर के साथ विवाह के बाद जोधाबाइ, मरियम उज-जमनि बेगम साहिबा के नाम से जानी गयी। जोधाबाई और अकबर की कहानी पर वर्ष 2008 में आशुतोष गोवरीकर के द्वारा फिल्म भी बनाई गयी थी। जिसमे मशहूर अभनेता ऋत्विक रोशन ने अकबर का पात्र निभाया था। और जोधाबाई का पात्र ऐश्वर्या राय बच्चन ने निभाया था। पूर्व काल सन 1960 में भी “मुगल-ए-आजम” फिल्म बनी थी जो काफी लोकप्रिय हुई थी। इस फिल्म में पृथ्वी राज कपूर साहब ने अकबर का किरदार निभाया था। अकबर के पुत्र का किरदार दिलीप कुमार और उनकी प्रेयसी का पात्र मधुबाला के द्वारा निभाया गया था। निरंतर समय पर अकबर बीरबल के किस्सों, और अकबर की जीवनी पर अलग अलग फिल्म और सीरियल्स बनते आ रहे हैं। इंटरनेट, बुक्स, फिल्म और अन्य कई माध्यम से अकबर और मुग़ल साम्राज्य से जुड़े साहित्य पर नए नए कार्यकर्म बनते आ रहे हैं।

अकबर बादशाह के नव रत्न:

1. बीरबल- (सन 1528 से सन1583) दरबार के विदूषक, परम बुद्धिशाली, और बादशाह के सलहकार।
2. फैजि-  (सन 1547 से 1596) फारसी कवि थे। अकबर के बेटे के गणित शिक्षक थे।
3. अबुल फज़ल-  (सन 1551 से सन 1602) अकबरनामा, और आईन-ए-अकबरी की रचना की थी।   
4. तानसेन-  (तानसेन उत्तम गायक थे। और कवि भी थे)।
5. अब्दुल रहीम खान-ए-खान- एक कवि थे, और अकबर के पूर्व काल के संरक्षक बैरम खान के बेटे थे।
6. फकीर अजिओं-दिन-  अकबर के सलाहकार थे।
7. टोडरमल-  अकबर के वित्तमंत्री थे।
8. मानसिंह- आमेर / जयपुर राज्य के राजा और अकबर की सेना के सेनापती भी थे।
9. मुल्लाह दो पिअजा- अकबर के सलहकार थे।

akabar

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