By | March 27, 2019
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वो रोती है मेरी कबर पर आकर

वो मजे में सोती थी मुझे रुलाकर , आज मैं चैन से सोया हूँ. , वो रोती है मेरी कबर पर आकर….

वो रोती है मेरी कबर पर आकर

बेवज़ह बिछड तो गये

बेवज़ह बिछड तो गये हो…. बस इतना बता दो… कि.. सुकून मिला या नहीं…??

बेवज़ह बिछड तो गये

बिलकुल ही बदल गया

वादा था मुकर गया , नशा था उतर गया , दिल था भर गया , वह इन्सान था जो बिलकुल ही बदल गया।

बिलकुल ही बदल गया

इतनी ही फिक्र है तो

नींद चुराने वाली पूछती हैं सोते क्यू नही हो तुम ….!!! इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यू नही हो तुम …

इतनी ही फिक्र है तो

उलझा रही है मुझको

उलझा रही है मुझको ये कशमकश अंदर से…कि तुम बस गये हो मुझमे या हम खो गए है तुझमे।

उलझा रही है मुझको

हम उन्हे भुला नही सकते

क्या पता क्या खूबी है उनमे ,, और क्या कमी है हम में , वो हमे अपना नही सकते , और हम उन्हे भुला नही सकते !!

 हम उन्हे भुला नही सकते

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