By | March 5, 2019
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ना जाने इस जमाने को

रोते रहे तुम भी रोते रहे हम भी… कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी.. . ना जाने इस जमाने को हमारे इश्क से.. क्या नाराजगी थी… . बस समझाते रहे तुम भी . और समझाते रहे हम भी

ना जाने इस जमाने को

काश हर सुबह वो

काश हर सुबह वो मुझसे लड़ने आए , कि कौन होते हो तुम रोज रोज मेरे ख्वाब में आने वाले…”

काश हर सुबह वो

मुझे यकीन है

मैं तुमसे इसलिए इतना लडता हूँ , क्योंकि मुझे यकीन है कि तुम मुझे कभी छोड़ के नहीं जाओगे !!

मुझे यकीन है

उस से मिलने की ख़ुशी

उस से मिलने की ख़ुशी ,फिर बाद में बहुत दुख देती है, मुझे जश्न के बाद का सन्नाटा बहुत खलता है।।।

उस से मिलने की ख़ुशी

तुझसे कितना प्यार करता हूं

मत पूछो मन कि मैं तुझसे कितना प्यार करता हूं, बस इतना जान लो… तुमसे करता हूं और बेपनाह करता हूं…

तुझसे कितना प्यार करता हूं

शायरी या गजल

“ये मेरी मन” मैं कहाँ शायरी या गजल लिखता हूं…. मैं तो जब भी लिखता हूं…. कभी तुझे लिखता हूँ…. तो कभी खुद को लिखता हूँ..!!

शायरी या गजल

रात में नींद

रात में नींद तो ले लेने दिया करो ओ मेरी मन , आँखे बंद करते ही सामने आ जाती हो…”

रात में नींद

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