By | March 12, 2019
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मुड़ मुड़ कर‬ ‪देखने‬ की

यूँ तो ‪आदत‬ नहीं है मुझे ‪ मुड़ मुड़ कर‬ ‪देखने‬ की , मगर तुम्हे‬ देखा तो लगा , एक बार और देख लूँ….

मुड़ मुड़ कर‬ ‪देखने‬ की
heart tenant

तुम्हें सोचते सोचते

काम के बोझ से तो नहीं , मैं तो बस थक जाता हूँ , तुम्हें सोचते सोचते…

 तुम्हें सोचते सोचते

ज़िन्दगी…तुम्हारे नाम

जानता हूँ… मैं लिखना नहीं जानता “ये मन” , मगर फिर भी ज़िन्दगी…तुम्हारे नाम लिख दी है ।।।

ज़िन्दगी…तुम्हारे नाम

इश्क़ मुसीबत बन गई

उसने कहीं , इश्क़ वेवजह मुसीबत बन गई हैं…. मैंने कहा , इश्क जिन्दगी जीने लेने की वजह बन गई हैं।।।

इश्क़ वेवजह मुसीबत बन गई

मोहब्बत क्या होती है

मोहब्बत क्या होती है मुझे मालूम नहीं था , बस एक पगली मिली और जिन्दगी पगलाकर चली गई।।।

मोहब्बत क्या होती है

वो बेनकाब हो गई

महफिल में काफी देर से बहस हो रही थी , कि चाँद से खूबसूरत कौन ? झुंझला कर वो बेनकाब हो गई।।।

 वो बेनकाब हो गई

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