By | March 6, 2019
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शहर तो बेवफा हो नहीं सकता

मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला, अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।

शहर तो बेवफा हो नहीं सकता

आखिर तुम सोचती क्या थी

हैरान नहीं हूं मैं तुम्हारे फैसलों से. बस ये सोच के डर लगता है कि आखिर तुम सोचती क्या थी मेरे बारे में ।

आखिर तुम सोचती क्या थी

उस बेवफा लडकी

आज तितलियाँ भी हमसे नफरत करती है । और कहती है , क्यू तोड़े हमारे फूल उस बेवफा लडकी के लिए ।

उस बेवफा लडकी

वफा ढूंढते हो

क्यों वफा ढूंढते हो…. बेगानों की बस्ती में…. वो देखो बेवफा
हस रही है…. कितनी मस्ती में…

वफा ढूंढते हो

पहले नाम था मेरा

बेवफा तो वो खुद हैं , पर इल्ज़ाम किसी और को देते हैं ; पहले नाम था मेरा उनके लबों पर , अब वो नाम किसी और का लेते हैं…….

पहले नाम था मेरा

सुकून ढुन्ढते रहे

रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हमने , कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने , दर्द मिला , तड़प मिला , सुकून ढुन्ढते रहे उसकी गली गली सारे।

सुकून ढुन्ढते रहे

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