By | March 10, 2019
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ये मेरी जिन्दगी

तेरे होठो पे गजल लिखु या तेरे जुलफो को सवारू, . ये मेरी जिन्दगी तुम्हे किस नाम से पुकारू।

ये मेरी जिन्दगी

ऐसा तो कभी हुआ

सुनो ” मन ” ऐसा तो कभी हुआ ही नहीं । तुमसे गले भी लगे और तुम्हे छुआ भी नहीं !!!

 ऐसा तो कभी हुआ

मेरी पसंद कैसी है

मैं जानता हूँ ” मन ” फिर भी पूछ रहा हूँ । तुम आईना देख कर बताओ न , मेरी पसंद कैसी है ???

मेरी पसंद कैसी है

बहुत ख़ूबसूरत

सुनो ” मन ” तुम जरा सी कम भी ख़ूबसूरत होती न ….. तब भी तुम मुझे बहुत ख़ूबसूरत लगती …..

बहुत ख़ूबसूरत

मेरे पास दिल था न

सुनो मन , मेरे पास वो चीज़ था न , जिसे “दिल” कहते हैं । वो किसी को दे दिया ।

मेरे पास दिल था न

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