By | March 12, 2019
Spread the love

मोड़ कर उँगलियाँ

मोड़ कर उँगलियाँ मिला कर अंगूठा दिल तो बना लोगे… मगर धड़कने के लिए जो चाहिए वो मोहब्बत कहां से लाओगे…??

मोड़ कर उँगलियाँ

तेरी यादोँ के ‘नशे’ मेँ

तेरी यादोँ के ‘नशे’ मेँ , अब ‘चूर’ हो रहा हूँ , लिखता हूँ ‘तुम्हेँ’ और , मैं ‘मशहूर’ हो रहा हूँ.

तेरी यादोँ के ‘नशे’ मेँ

रूठोगे जो कभी

रूठोगे जो कभी तो तुम्हे हँस के मना लेंगे . फिर भी ना माने तो बस इस सीने से लगा लेंगे।

रूठोगे जो कभी

क्योंकि मुझे यकीन है

मैं तुमसे इसलिए इतना लडता हूँ , क्योंकि मुझे यकीन है , कि तुम मुझे कभी छोड़ के नहीं जाओगे !!

क्योंकि मुझे यकीन है

मेरे महबूब की मासूमियत

अजीब अंदाज़ है मेरे महबूब की मासूमियत का , मैं तस्वीर में भी देखूँ , तो वो पलकें झुका लेता है…

मेरे महबूब की मासूमियत

काश हर सुबह

काश हर सुबह वो मुझसे लड़ने आए , कि कौन होते हो तुम रोज रोज मेरे ख्वाब में आने वाले…”

काश हर सुबह

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *