By | March 4, 2019
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क्यों की मोहब्बत

जिस जिस को मिली खबर, सबने एक ही सवाल किया… मुझसे ….??? तुमने क्यों की मोहब्बत…? तुम तो समझदार थे…

क्यों की मोहब्बत

कौन होते हो तुम

काश हर सुबह वो मुझसे लड़ने आए, कि कौन होते हो तुम रोज रोज मेरे ख्वाब में आने वाले…”

 कौन होते हो तुम

तुम्हें सोचते सोचते

काम के बोझ से तो नहीं, मैं तो बस थक जाता हूँ, तुम्हें सोचते सोचते…

तुम्हें सोचते सोचते

मेरी क्या जरुरत है

मेरी चाहत ने निखारा है इस कदर तुझको , कि आईना भी कहता है मेरी क्या जरुरत है तुझको….

मेरी क्या जरुरत है

उसके दिल पर किसी और का नाम

गलती से ये दिल उसके नाम कर दिया हमने, भला मुझे क्या पता , उसके दिल पर किसी और का नाम लिखा था…।।।

उसके दिल पर किसी और का नाम

जब याद करने वाला

ये कफ़न, ये जनाजे, ये कबर……!!!! रस्म-ऐ-दुनीया है दोस्त, मर तो इंसान तब ही जाता है जब याद करने वाला कोई न हो….

जब याद करने वाला

तेरी जैसी कोई नही

बेसक तुझे इस दुनिया में मेरे जैसे बहुत मिलेगे…. मगर मुझे इस दुनिया में तेरी जैसी कोई नही मिलेगी।।।

तेरी जैसी कोई नही

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