By | March 6, 2019
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छुपकर उसे देख रहा था

मैं छुपकर उसे अपने खिड़कीयो से देख रहा था । वह बिना देखे बड़े शान से मेरे मुहल्ले से गुजर रही थी।

 छुपकर उसे अपने खिड़कीयो से देख रहा था

तुम्हें नाराज होने के डर से

तुम्हें नाराज होने के डर से हम लिखते नहीं है , वरना, लिखने पे जो हम आये तो क़लम से सर क़लम कर दें.. !!

तुम्हें नाराज होने के डर से

ये राते और तेरी बाते

मै जा रहा हूँ अपनी इस जिन्दगी से दूर , आज के बाद ” ये राते और तेरी बाते ” नहीं होगी ।

ये राते और तेरी बाते

करीब से गुजर गया,

करीब से गुजर गया, क्यों मुझको तन्हा कर गया। खाली खाली दिल में, दर्द ऐसा भर गया। जिसकी दुनिया में कोई नहीं दवा !!!

करीब से गुजर गया,

सिर्फ तुम्हारे होने का

अच्छा हुआ तुमने मुझे तोड़ कर रख दिया । बहुत घमन्ड हो गया था मुझे , सिर्फ तुम्हारे होने का !!!

सिर्फ तुम्हारे होने का

जिंदगी समझा था उसे

क्या समझा था उसे, और क्या हो गया ! अपनी जिंदगी समझा था उसे, और बर्बाद हो गया !!!

 जिंदगी समझा था उसे

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