By | March 27, 2019
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मैंने ही उसे बेशुमार चाहा

ख्वाहिश थी की वो मुझे याद करे मेरी तरह , मगर ख्वाहिश थी.. ख्वाहिश ही रह गई ….  इसमें गलती उसकी नहीं गलती मेरी थी कि मैंने ही उसे बेशुमार चाहा था।

मैंने ही उसे बेशुमार चाहा

थोड़ी देर ठहर जाती तुम

सुनो ,, थोड़ी देर ठहर जाती तुम ,, तो शायद तुम्हें मिल जाते हम ,, क्योंकि इश्क ज़ल्दबाज़ी का नही ,, इन्तज़ार का नाम है ,,

थोड़ी देर ठहर जाती तुम

सफर बड़ी मुश्किल से गुजर रहा

ना तुम मेरे करीब हो और न ही ज्यादा दूर , फिर भी ये बीच का सफर बड़ी मुश्किल से गुजर रहा हैं।

सफर बड़ी मुश्किल से गुजर रहा

क्यों मुझसे रुठि रुठि

बात तो हम भी बहुत करना चाहते हैं उनसे , पर न जाने क्यों मुझसे रुठि रुठि रहती हैं।

क्यों मुझसे रुठि रुठि

मेरे जीने की वजह

दिल मे ना जाने कैसे तेरे लिए इतनी जगह बन गई , तेरे मन की हर छोटी सी चाह मेरे जीने की वजह बन गई

मेरे जीने की वजह

भूल चुका हूँ मुस्कुराने का हुनर

लगता है कि मैं भूल चुका हूँ मुस्कुराने का हुनर … कोशिश जब भी करता हूँ आँसू निकल आते हैं..!

भूल चुका हूँ मुस्कुराने का हुनर

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